मेरठ से करीब 20 किलोमीटर दूर खजूंरी गांव में कभी गंदगी के लिए पहचाने जाने वाला तालाब अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है. उत्तर प्रदेश शासन की योजनाओं के तहत इसे इको फ्रेंडली टूरिज्म के रूप में तैयार किया गया है, जहां लोग पिकनिक, खाने-पीने और प्राकृतिक माहौल का आनंद लेने पहुंच रहे हैं.
मेरठ: बदलते दौर के साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास कार्यों की नई तस्वीर देखने को मिल रही है. इसका एक बेहतरीन उदाहरण मेरठ से करीब 20 किलोमीटर दूर किला परीक्षितगढ़ ब्लॉक का खजूंरी गांव है. यहां कभी गंदगी के लिए बदनाम रहने वाला तालाब अब पूरी तरह बदला हुआ नजर आता है और गांव में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहचान बना रहा है.
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खजूंरी गांव के इस तालाब को इको फ्रेंडली टूरिज्म के तहत विकसित किया गया है. कभी गंदगी के लिए पहचाने जाने वाला यह तालाब अब क्षेत्र के लिए एक बेहतर पिकनिक स्पॉट के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. यहां आसपास के कई गांवों से लोग पहुंचकर प्राकृतिक माहौल के बीच समय बिताने और खाने-पीने का आनंद लेते नजर आते हैं.
किला परीक्षितगढ़ ब्लॉक के एडीओ पंचायत रामनरेश के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक जल निकासी की होती है. इसके समाधान के लिए तालाबों को महत्वपूर्ण साधन माना जाता है, लेकिन नालियों के जरिए पानी के साथ-साथ गंदगी भी तालाब में पहुंच जाती है, जिससे आसपास का वातावरण दूषित होने लगता है. इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए खजूंरी गांव में एक अनोखा प्रयोग किया गया.
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उन्होंने बताया कि इसके लिए सबसे पहले ग्रामीण क्षेत्र से नालियों के माध्यम से तालाब में आने वाले पानी को साफ करने की व्यवस्था की गई. इसके तहत कई तरह के फिल्टर लगाए गए, ताकि तालाब में पहुंचने वाला पानी स्वच्छ हो और उसमें किसी भी तरह की गंदगी न रहे. इसके साथ ही तालाब के आसपास खाली पड़ी जमीन को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए कार्य योजना तैयार कर शासन को भेजी गई.
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद यहां विकास कार्य कराए गए. उन्होंने बताया कि तालाब के नजदीक इको फ्रेंडली स्टॉल भी बनाई गई हैं, जहां किला परीक्षितगढ़ घूमने आने वाले पर्यटक खाने-पीने की विभिन्न चीजों का आनंद ले सकते हैं. वहीं, पहले ग्रामीण क्षेत्रों के लोग जन्मदिन जैसे कार्यक्रमों के लिए शहरों का रुख करते थे, ताकि रेस्टोरेंट में आयोजन कर सकें. अब गांव में ही बेहतर सुविधा उपलब्ध होने लगी है.
लेकिन अब ग्रामीण युवा यहीं पर अपना जन्मदिन मनाते हुए दिखाई देंगे, क्योंकि इन इको फ्रेंडली स्टॉल को काफी बेहतर तरीके से विकसित किया गया है. उन्होंने बताया कि यहां पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अनोखे अंदाज में पेड़ों पर घोंसले और अन्य तरह की सजावट की गई है. चिड़ियों की चहचहाहट लोगों को काफी आकर्षित करती है. वहीं खाने-पीने के लिए टिक्की, चाऊमीन, केक, बर्गर, पिज्जा समेत कई तरह की चीजें उपलब्ध हैं.
वहीं यहां लाइटिंग की भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिससे शाम के समय भी यह स्थान आकर्षक नजर आता है. अब आसपास के गांवों के लोग भी यहीं पर खाने-पीने से जुड़ी चीजों का आनंद लेते दिखाई देते हैं. उन्होंने बताया कि इको फ्रेंडली स्टॉल से मिलने वाले किराए का उपयोग ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों में किया जा रहा है. इससे गांव में स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है और जिस तालाब के पास पहले लोग जाना भी पसंद नहीं करते थे, वही तालाब अब आमदनी का जरिया बन रहा है.
बताते चलें कि किला परीक्षितगढ़ महाभारत कालीन दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह महाभारत कालीन सर्कल से जुड़ा हुआ क्षेत्र है, जहां कई ऐतिहासिक मंदिर और तीर्थ स्थल देखने को मिलते हैं. इसे कलयुग के आगाज से जुड़े प्रमुख केंद्रों में भी माना जाता है, जिसके चलते देशभर से बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने पहुंचते हैं. ऐसे में खजूंरी गांव में तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास की लोग सराहना कर रहे हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह टूरिज्म को बढ़ावा देने से जहां रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, वहीं स्वच्छता और विकास को भी नई दिशा मिलेगी.
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