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Kark Sankranti Puja: सनातन धर्म में सूर्य कर्क संक्रांति का विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है। जब सूर्य देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, तब कर्क संक्रांति होती है। इसी दिन से दक्षिणायन का आरंभ भी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में देवताओं की रात्रि प्रारंभ होती है, इसलिए जप, तप, दान और भगवान की आराधना का महत्व और भी बढ़ जाता है। कर्क संक्रांति के दिन पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य, दान-पुण्य और मंत्र-जप करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।ALSO READ: Kark Sankranti 2026: सूर्य कर्क संक्रांति पर करें ये 7 शुभ कार्य, मिलेगी सूर्य देव की कृपा

 

  • सूर्य कर्क संक्रांति पर स्नान का महत्व
  • दान का महत्व
  • पूजा का महत्व
  • सूर्य संक्रांति पर क्या करें?

 

आइए जानते हैं कि सूर्य कर्क संक्रांति 2026 पर स्नान, दान और पूजा का क्या महत्व है…

 

सूर्य कर्क संक्रांति पर स्नान का महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार कर्क संक्रांति के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या कुंड में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि यह संभव न हो तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

 

स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करने और भगवान विष्णु का स्मरण करने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे मन और शरीर की शुद्धि होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

 

दान का महत्व

सनातन परंपरा में संक्रांति के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, गेहूं, गुड़, तांबे के पात्र, लाल वस्त्र, फल, जल से भरा घड़ा और जरूरतमंदों को भोजन कराने का विशेष पुण्य माना जाता है। यह दान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा और परोपकार की भावना को भी मजबूत करता है। मान्यता है कि निस्वार्थ भाव से किया गया दान शुभ फल प्रदान करता है।

 

पूजा का महत्व

कर्क संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। प्रातःकाल तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ घृणि: सूर्याय नमः’, आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्याष्टक का पाठ करना शुभ माना जाता है।

 

इसके साथ ही भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से आत्मबल, सकारात्मकता और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

 

सूर्य संक्रांति पर क्या करें?

* प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें।

* सूर्य मंत्रों का जप करें।

* भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करें।

* जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और गुड़ का दान करें।

* पूरे दिन सात्विक भोजन करें और क्रोध, असत्य व कटु वचन से बचें।

* परिवार में बड़ों का सम्मान करें और सेवा-भाव रखें।

 

सूर्य कर्क संक्रांति केवल सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सेवा और आध्यात्मिक साधना का भी विशेष अवसर है। इस दिन श्रद्धा के साथ स्नान, दान और सूर्य देव की पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है। कुल मिलाकर यह पर्व हमें संयम, परोपकार और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा भी देता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: सूर्य के दक्षिणायन होने का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है?

 

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