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Ghaziabad Pink Booth Death Case Police Face Questions After Man Dies Waiting for Help at Pink Booth

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– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

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गाजियाबाद में आमजन की सुरक्षा की शपथ लेने वाली खाकी उस वक्त संवेदनहीन नजर आई, जब राजकुमार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे। पिंक बूथ परिसर में बिखरे खून के निशान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कमिश्नरेट पुलिस हादसों में घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए लगातार गोल्डन ऑवर की अहमियत समझाती है, लेकिन राजकुमार के मामले में यही जीवनरक्षक समय आंखों के सामने गुजरता रहा और पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे।


बिहार के सीवान जिले के बढुलिया गांव निवासी राजकुमार (22) सेक्टर-23 संजयनगर में किराये के मकान में रहता था। महज दो कमरों के इस घर में पहले से ही जिंदगी की मुश्किलें कम नहीं थीं। पिता भोला (71) चार वर्षों से कोमा में हैं। ब्रेन हेमरेज के बाद आर्थिक तंगी के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो सका और वह पिछले चार साल से दुनिया से बेखबर हैं।

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