Image Slider

-जेल में बंद कुख्यात उमेश पंडित के इशारे पर मेरठ से मंगाई जाती थीं विदेशी मार्का पिस्टल, 50 से 55 हजार रुपये में होती थी सप्लाई
-स्वॉट टीम और लोनी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में तीन शातिर गिरफ्तार, सात पिस्टल, दर्जनों कारतूस और महिंद्रा थार बरामद
-20 से ज्यादा हथियार बेचने की कबूली वारदात, दो साथी अब भी फरार; पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गैंगवार से जुड़े हैं तार

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात बदमाश उमेश पंडित के इशारों पर संचालित हो रहे अंतरराज्यीय हथियार तस्करी गिरोह का गाजियाबाद पुलिस ने बड़ा पर्दाफाश किया है। पुलिस कमिश्नर जे. रविन्दर गौड़ के निर्देशन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत स्वॉट टीम (क्राइम ब्रांच) और लोनी थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से सात अवैध पिस्टल, बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस तथा तस्करी में प्रयुक्त महिंद्रा थार बरामद हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले एक वर्ष से अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त कर रहा था और अब तक 20 से अधिक पिस्टलों की सप्लाई कर चुका है।
मंगलवार को पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) राज करन नैय्यर ने एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह की मौजूदगी में पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजीव गार्डन इंद्रापुरी निवासी अरुण कुमार (46), सुधीर एंक्लेव राम पार्क निवासी रंजीत राय (39) तथा दिल्ली के सभापुर निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ मोटू (29) के रूप में हुई है। तीनों लंबे समय से अवैध हथियारों की तस्करी में सक्रिय थे और रणदीप भाटी तथा उमेश पंडित गिरोह से जुड़े हुए हैं। पुलिस कमिश्नर ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली संयुक्त पुलिस टीम को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अंकुर विहार, लोनी क्षेत्र में उनका प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्यालय है। इसी दौरान रंजीत राय के माध्यम से उनकी पहचान तिहाड़ जेल में बंद कुख्यात अपराधी उमेश पंडित से हुई। जेल में रहते हुए भी उमेश पंडित पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसने आरोपियों को शामली जनपद के थाना भवन निवासी रितिक से संपर्क करने के लिए कहा। रितिक प्रत्येक पिस्टल 30 से 35 हजार रुपये में उपलब्ध कराता था, जिसे आरोपी उमेश पंडित के बताए लोगों को 50 से 55 हजार रुपये में बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। पुलिस अब रितिक और उसके सहयोगी सुनील पहलवान निवासी खडख़ड़ी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह पाकिस्तान, जर्मनी और इटली के नाम की फर्जी मार्किंग वाली पिस्टलों की तस्करी करता था, जिससे खरीदारों को विदेशी हथियार होने का भ्रम पैदा किया जा सके। इन हथियारों की सप्लाई उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में की जाती थी। आरोपियों ने स्वीकार किया कि बीते एक वर्ष में वे 20 से अधिक पिस्टल बेच चुके हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह के माध्यम से बड़ी संख्या में अपराधियों तक अवैध हथियार पहुंचे हैं, जिसके चलते अब खरीददारों और पूरे नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

बरामदगी के संबंध में एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से छह पिस्टल .32 बोर मैगजीन सहित, एक पिस्टल .30 बोर मैगजीन सहित, कुल 22 जिंदा कारतूस तथा तस्करी में प्रयुक्त काले रंग की महिंद्रा थार बरामद की गई है। पुलिस इन हथियारों की फॉरेंसिक जांच कराने के साथ-साथ यह भी पता लगा रही है कि इनका इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात में तो नहीं हुआ। जांच के दौरान उमेश पंडित के आपराधिक इतिहास की भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। लोनी के राम पार्क एक्सटेंशन का रहने वाला उमेश पंडित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित अपराधियों में शामिल रहा है। उस पर गैंगवार और कई हत्याओं के आरोप दर्ज हैं। उसके पिता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में हवलदार रहे हैं। दो भाइयों में बड़ा उमेश बीए ऑनर्स तक पढ़ा है और वर्ष 2005 में छात्र राजनीति से जुडऩे के दौरान उसने पहली बार एक छात्र की गोली मारकर हत्या की थी।

बाद में डासना जेल में उसकी मुलाकात नरेश भाटी गिरोह के नरेंद्र प्रधान और अनिल दुजाना से हुई, जिसके बाद वह संगठित अपराध की दुनिया में सक्रिय हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2005 के हत्या मामले में निचली अदालत ने उमेश पंडित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद है। इसके बावजूद वह जेल के भीतर से अपने गुर्गों के माध्यम से अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क संचालित कर रहा था। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि जेल के भीतर से उसका संपर्क किन माध्यमों से बाहर के नेटवर्क से बना हुआ था और इस पूरे गिरोह में कितने अन्य लोग शामिल हैं।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर राज करन नैय्यर ने कहा कि ऑपरेशन प्रहार के तहत अवैध हथियारों की तस्करी, गैंगस्टर गतिविधियों और संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर दी गई हैं। साथ ही बरामद हथियारों के स्रोत, सप्लाई चेन और खरीददारों की पहचान कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि अंतरराज्यीय हथियार तस्करी से जुड़े इस गिरोह के खिलाफ जल्द ही गैंगस्टर एक्ट सहित अन्य कठोर धाराओं में भी कार्रवाई की जाएगी।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||