अमावस्या की रात का अचूक उपाय: ‘पितृ दीप दान’
अमावस्या की रात को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाना सबसे फलदायी माना गया है। शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है।
इस उपाय को कैसे करें?
समय: आषाढ़ अमावस्या की संध्याकाल (सूर्यास्त के बाद) या रात्रि के समय।
विधि:
– सूर्यास्त के बाद अपने घर के मुख्य द्वार पर या घर के दक्षिण कोने में आएं।
– दीपक में सरसों का तेल डालें और एक लंबी बत्ती लगाएं।
– इस दीपक को इस तरह रखें कि इसकी लौ का मुख दक्षिण दिशा यानी South की तरफ हो।
– दीपक जलाते समय मन ही मन अपने पूर्वजों का ध्यान करें और उनसे जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
– उनसे प्रार्थना करें: ‘हे पितृ देव, यह प्रकाश आपके मार्ग को आलोकित करने के लिए है। इसे स्वीकार करें, तृप्त हों और अपनी कृपा हम पर बनाए रखें।’
ऐसा क्यों करते हैं?
मान्यता है कि अमावस्या की रात को पितृ लोक से पूर्वज पृथ्वी लोक पर अपने परिजनों को देखने आते हैं। दक्षिण दिशा में जलाया गया यह दीपक उनके मार्ग को आलोकित/ उजाला करता है, जिससे वे खुश होकर अपने वंशजों को सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं और शांतिपूर्वक वापस लौट जाते हैं।
कुछ अन्य बातें जिनका रखें ध्यान:
यदि संभव हो तो अमावस्या के दिन दोपहर के समय किसी जरूरतमंद को अन्न, जल या काले तिल का दान करें। अमावस्या की रात को घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखें, किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से बचें।
आषाढ़ अमावस्या की रात दक्षिण दिशा में तिल के तेल का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण करना एक सरल और शुभ धार्मिक उपाय माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक परंपराएं और लोकविश्वास हैं।
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