यदि आप आज के दिन ये 5 विशेष कार्य कर लेते हैं, तो भाग्य का साथ मिलने लगता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं:
1. पितरों के नाम तर्पण और दान
अमावस्या तिथि मुख्य रूप से पितरों को समर्पित होती है। आज के दिन सुबह स्नान करने के बाद तांबे के लोटे में जल, गंगाजल, काले तिल और जौ मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को अर्घ्य दें। इसके बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न जैसे- गेहूं, चावल, वस्त्र या काले तिल का दान करें। इससे पितृ दोष शांत होता है और तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
2. पीपल के वृक्ष की पूजा और दीपदान
शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ-साथ पितरों का भी वास होता है। आज शाम के समय पीपल के पेड़ के पास जाएं, वहां जल अर्पित करें और सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। पीपल की सात परिक्रमा करें और अपने सुखद भविष्य की कामना करें। इससे शनि देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
3. हनुमान चालीसा का पाठ
4. मुख्य द्वार पर दीपक और गंगाजल का छिड़काव
शाम के समय यानी प्रदोष काल में अपने घर के मुख्य द्वार को साफ करें और वहां हल्दी मिले जल या गंगाजल का छिड़काव करें। इसके बाद मुख्य दरवाजे के बाहर दाहिनी ओर एक दीपक जलाकर रखें। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का आगमन होता है और दरिद्रता दूर होती है।
5. बेजुबान जीवों को भोजन कराना
आज के दिन चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालें, काले कुत्ते को तेल चुपड़ी हुई रोटी खिलाएं और मछलियों के लिए आटे की गोलियां नदी या तालाब में डालें। शास्त्रों में माना गया है कि जब हम बेजुबान जीवों की सेवा करते हैं, तो हमारे संचित पाप कटते हैं और सोया हुआ भाग्य जाग उठता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी और अमावस्या का संयोग आत्मशुद्धि, पितृ तृप्ति और ईश्वर आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धा, संयम और अच्छे विचारों के साथ किए गए शुभ कर्म आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम बनते हैं। सकारात्मक सोच और सेवा भाव ही आपकी किस्मत को चमकाने की सबसे बड़ी कुंजी है।
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