Bareilly News: कम लागत, कम जगह और बेहतर, आमदनी.ऑयस्टर मशरूम की यह वैज्ञानिक खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखती है. यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर अपनाया गया तो हजारों किसानों और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
खेती अब केवल खेतों तक सीमित नहीं रही. बरेली में जिला कमांडेंट राजमणि सिंह ने किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसमें मात्र 10×12 या 10×15 फीट के एक कमरे में ऑयस्टर मशरूम की खेती कर हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित की जा सकती है.
कम जगह और बेहतर मुनाफा
राजमणि सिंह ने लोकल 18 को बताया कि उनका उद्देश्य किसानों को ऐसा स्वरोजगार उपलब्ध कराना है, जिसमें कम लागत, कम जगह और बेहतर मुनाफा हो. इसी सोच के साथ वे छुट्टियों के दिनों में स्वयं गांव-गांव जाकर किसानों को प्रशिक्षण देते हैं. इस अभियान में महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और मशरूम विशेषज्ञ भी किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन की जानकारी देते हैं.
10 से 15 हजार रुपये की लागत में उत्पादन शुरू
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मशरूम बैग तैयार करने, तापमान और नमी बनाए रखने, फसल की देखभाल और विपणन तक की पूरी जानकारी दी जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय जलवायु ऑयस्टर मशरूम की खेती के लिए अनुकूल है और इसकी खेती लगभग पूरे वर्ष की जा सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 10 से 15 हजार रुपये की लागत में पूरा स्ट्रक्चर तैयार कर उत्पादन शुरू किया जा सकता है.
शारीरिक और मानसिक विकास में भी उपयोगी
राजमणि सिंह बताते हैं कि मशरूम केवल आय का साधन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी सुपरफूड है. इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज और कई आवश्यक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. नियमित सेवन से शरीर में पोषण की कमी दूर होती है. महिलाओं में एनीमिया की समस्या कम करने और बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी यह उपयोगी माना जाता है.
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू किसानों के उत्पाद की बिक्री सुनिश्चित करना भी है. जिला कमांडेंट का कहना है कि प्रशिक्षण के साथ-साथ बाजार विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है, ताकि किसानों को अपने उत्पाद बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें उचित मूल्य मिल सके.
दूसरे जिलों के लिए बनी प्रेरणा
बरेली से शुरू हुई यह पहल अब दूसरे जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रही है. वर्तमान में राजमणि सिंह उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स विभाग में चंदौली के जिला कमांडेंट के रूप में तैनात हैं और गाजीपुर जिले का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं. उनकी यह मुहिम दिखाती है कि यदि प्रशासन, विश्वविद्यालय और किसान मिलकर काम करें तो सीमित संसाधनों में भी रोजगार, पोषण और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की जा सकती है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…और पढ़ें
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