Image Slider

नई दिल्ली (Temple Management Course in India). अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए नए सीईओ की तलाश तेज हो गई है. दिल्ली में हुई राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की सर्च कमेटी की पहली बैठक में नए मुखिया के चयन के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं. इस हाई-प्रोफाइल पद के लिए कम से कम 20 साल का प्रशासनिक या फाइनेंशियल अनुभव मांगा गया है. लेकिन सबसे दिलचस्प बात है कि सिलेक्शन में टेंपल मैनेजमेंट यानी मंदिर प्रबंधन का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी.

देश के बड़े आस्था केंद्रों और धार्मिक स्थलों को अब कॉर्पोरेट स्टाइल में संभाला जा रहा है. इसी वजह से टेंपल मैनेजमेंट कोर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. राम मंदिर के इस नए फैसले के बाद बहुत लोग जानना चाहते हैं कि टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में आखिर क्या सिखाया जाता है, भारत में इसकी पढ़ाई कहां-कहां होती है और बड़े आस्था केंद्रों को प्रोफेशनल तरीके से संभालने के लिए किस तरह की योग्यता चाहिए. समझिए मंदिर प्रबंधन से जुड़े कोर्स की डिटेल्स और इसमें करियर की संभावनाएं.

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स क्या है, इसके लिए क्या योग्यता चाहिए?

किसी भी बड़ी कंपनी को चलाने के लिए MBA प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है. वैसे ही बड़े मंदिरों के प्रबंधन, क्राउड मैनेजमेंट और वहां का फंड संभालने के लिए टेंपल मैनेजमेंट के एक्सपर्ट तैयार किए जाते हैं. इस फील्ड में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं. शॉर्ट-टर्म या डिप्लोमा कोर्स करने के लिए किसी भी स्ट्रीम से 12वीं पास होना जरूरी है. वहीं, बड़े पदों या पीजी डिप्लोमा के लिए ग्रेजुएशन (स्नातक) की डिग्री अनिवार्य होती है. राम मंदिर के CEO पद के लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन रखी गई है.

भारत में टेंपल मैनेजमेंट की पढ़ाई कहां होती है?

भारत में कई यूनिवर्सिटीज और धार्मिक संस्थान टेंपल मैनेजमेंट या उससे जुड़े कोर्स ऑफर करते हैं:

  • आंध्र यूनिवर्सिटी (विशाखापट्टनम): यहां मंदिर प्रबंधन में डिप्लोमा कोर्स कराया जाता है.
  • तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD): तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े संस्थान समय-समय पर इसके लिए ट्रेनिंग और वर्कशॉप आयोजित करते हैं.
  • मुंबई यूनिवर्सिटी और कुछ संस्कृत यूनिवर्सिटी: इनके तहत भी हेरिटेज और रिलिजियस टूरिज्म और मैनेजमेंट से जुड़े शॉर्ट टर्म कोर्स चलाए जाते हैं.

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की फीस कितनी है?

टेंपल मैनेजमेंट के सर्टिफिकेट कोर्स आमतौर पर 3 से 6 महीने के होते हैं. डिप्लोमा कोर्स 1 साल का होता है, जबकि पीजी डिप्लोमा कोर्स 1 से 2 साल तक का हो सकता है.

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स की फीस बेहद किफायती है. सरकारी यूनिवर्सिटी और सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थानों में इस कोर्स की सालाना फीस 5,000 रुपये से लेकर 25,000 रुपये के बीच होती है. कुछ निजी संस्थान या विशेष ट्रस्ट अपने स्तर पर अलग फीस तय कर सकते हैं.

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स में क्या-क्या पढ़ाया और सिखाया जाता है?

टेंपल मैनेजमेंट कोर्स का सिलेबस काफी यूनीक होता है. इसमें सिर्फ पूजा-पाठ के नियम नहीं, बल्कि प्रोफेशनल लीडर बनना सिखाया जाता है. इसमें मुख्य रूप से ये चीजें सिखाई जाती हैं:

  • क्राउड मैनेजमेंट: त्योहारों पर जुटने वाली लाखों की भीड़ को बिना किसी हादसे के कैसे संभालना है.
  • फाइनेंस और ऑडिट: मंदिर में आने वाले दान, चढ़ावे और ट्रस्ट के पैसों का हिसाब-किताब रखना.
  • कानूनी नियम: मंदिर से जुड़े ट्रस्ट एक्ट, भूमि विवाद और सरकारी नियमों की जानकारी.
  • हॉस्पिटैलिटी और स्वच्छता: श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था और परिसर को साफ रखना.
  • प्राचीन इतिहास और संस्कृति: मंदिरों की वास्तुकला, इतिहास और उनका धार्मिक महत्व समझना.

टेंपल मैनेजमेंट के लिए जरूरी स्किल्स

राम मंदिर के नए CEO के लिए अयोध्या में रहकर 3 साल काम करने और हिंदू धर्म का होने की शर्त है. हर मंदिर इसी तरह से अपने हिसाब से गाइडलाइंस तय करता है. इस फील्ड में अपनी जगह बनाने और सफल होने के लिए गजब की कम्युनिकेशन स्किल होनी चाहिए. इसके अलावा, संकट के समय तुरंत फैसला लेने की क्षमता (Crisis Management), धैर्य, टीम को साथ लेकर चलने का हुनर (टीम मैनेजमेंट/टीम प्लेयर) और सनातन परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा होना बेहद जरूरी है.

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||