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नई दिल्ली (Different Types of NEET Exams). देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया को आसान और एक समान बनाने के लिए नीट यूजी की शुरुआत की गई थी. लेकिन वक्त के साथ इस परीक्षा पर दबाव इतना बढ़ गया है कि अब व्यवस्था में बड़े बदलाव दिखने लगे हैं. हर साल 20 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी नीट यूजी परीक्षा देते हैं, जिसे देखते हुए अब अलग-अलग मेडिकल कोर्स के लिए अलग तरह के ‘नीट’ आयोजित होने शुरू हो गए हैं.

नीट यूजी 2026 रिजल्ट का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. एनटीए ने OMR शीट्स का मूल्यांकन तेज कर दिया है और उम्मीद है कि 20 जुलाई से पहले नतीजे घोषित हो जाएंगे. इस स्कोर से अभ्यर्थियों को MBBS, BAMS और BHMS जैसे कोर्सेस में एडमिशन मिलता है. लेकिन इसी दौरान सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने ‘नीट पीए’ (प्री आयुर्वेदिक) का नोटिफिकेशन जारी करके हलचल मचा दी है. माना जा रहा है कि आने वाले समय में NEET UG के जरिए BAMS में एडमिशन का रास्ता बंद या बेहद सीमित हो सकता है.

बीएएमएस में एडमिशन का नया गणित क्या है?

बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंस (BAMS) कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं के बाद नीट यूजी परीक्षा पास करना अनिवार्य माना जाता था. लेकिन अब मेडिकल एजुकेशन में नया मोड़ आ गया है. सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने NEET PA की शुरुआत की है, जो 10वीं पास करने वाले उन स्टूडेंट्स के लिए है जिन्होंने संस्कृत पढ़ी हो. यह इंटीग्रेटेड प्री-आयुर्वेदिक प्रोग्राम है. इसके तहत छात्र 10वीं के बाद सीधे दाखिला लेंगे.

यह डिग्री कोर्स 7.5 साल का है. इस कोर्स को नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) से हरी झंडी मिल चुकी है. इसे यूनिवर्सिटी से जुड़े आयुर्वेदिक गुरुकुलों के जरिए चलाया जाएगा. अगर BAMS की ज्यादातर सीटें इसी सिस्टम से भरी जाने लगीं तो NEET UG के जरिए BAMS में एडमिशन के मौके लगभग खत्म हो जाएंगे. हालांकि कुछ सीटें नीट यूजी के लिए रिजर्व रखी जा सकती हैं.

देश में कितनी तरह के नीट परीक्षाएं होती हैं?

मेडिकल के अलग-अलग फील्ड्स में एडमिशन के लिए अब सिर्फ एक नहीं, बल्कि 5 तरह के NEET एग्जाम हो चुके हैं:

1. नीट यूजी (अंडरग्रेजुएट): यह सबसे पॉपुलर परीक्षा है जिसे NTA कराता है. इसमें 12वीं पास स्टूडेंट्स बैठते हैं और इसके जरिए MBBS, BDS, BHMS, नर्सिंग और फिलहाल BAMS में भी एडमिशन मिलता है.

2. नीट पीए (प्री-आयुर्वेदिक): यह इसी साल से शुरू हो रही नई व्यवस्था है. 10वीं पास संस्कृत बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए यह सुनहरा मौका है, जिसके जरिए वे सीधे इंटीग्रेटेड BAMS कोर्स में एंट्री पा सकेंगे.

3. NEET-SR-UG: तिब्बती मेडिसिन (Sowa-Rigpa) के ग्रेजुएशन कोर्स में दाखिले के लिए इस खास परीक्षा का आयोजन किया जाता है. इसकी जिम्मेदारी NCISM संभालता है और फिलहाल इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है.

4. NEET PG (पोस्टग्रेजुएट): एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके स्टूडेंट्स आगे की स्पेशलाइजेशन यानी MD, MS या अन्य मेडिकल पीजी डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन के लिए यह परीक्षा पास करते हैं.

5. NEET SS (सुपर स्पेशलिटी): यह मेडिकल फील्ड की सबसे ऊंची सीढ़ियों में से एक है. NEET PG पास करने के बाद अगर कोई डॉक्टर DM या MCh जैसे बेहद एडवांस सुपर-स्पेशलिटी कोर्स में जाना चाहता है तो उसे यह एग्जाम देना होता है.

मेडिकल एजुकेशन का ढांचा अब तेजी से बदल रहा है. स्टूडेंट्स को अपनी पसंद के हिसाब से सही परीक्षा का चुनाव करना चाहिए.

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