Samastipur News: एस.एन. ठाकुर बताते है कि जब उन्होंने 1970 में बीएड किया था तब समस्तीपुर में सिर्फ एक ही कॉलेज था. उस समय पढ़ाई के लिए छात्रों से बहुत कम फीस ली जाती थी और आर्थिक बोझ जैसी कोई बात नहीं थी. उन्होंने कहा कि आज प्राइवेट कॉलेजों की संख्या बढ़ गई है और छात्र लाखों रुपये खर्च करके बीएड की पढ़ाई कर रहे है.
करीब 36 सालों तक टीचर के तौर पर सेवा देने वाले ठाकुर ने बताया कि उस दौर में न तो आज जैसी आधुनिक तकनीक थी और न ही ऑनलाइन पढ़ाई. फिर भी छात्र अनुशासन, मेहनत और टीचर्स के मार्गदर्शन से सफलता हासिल करते थे. उनके मुताबिक उस समय शिक्षा का मकसद सिर्फ नौकरी पाना नहीं, बल्कि समाज और चरित्र का निर्माण करना भी था.
एस.एन. ठाकुर बताते है कि जब उन्होंने 1970 में बीएड किया था तब समस्तीपुर में सिर्फ एक ही कॉलेज था. उस समय पढ़ाई के लिए छात्रों से बहुत कम फीस ली जाती थी और आर्थिक बोझ जैसी कोई बात नहीं थी. उन्होंने कहा कि आज प्राइवेट कॉलेजों की संख्या बढ़ गई है और छात्र लाखों रुपये खर्च करके बीएड की पढ़ाई कर रहे है.
उन्होंने बताया कि टीचर रहते हुए उनकी पोस्टिंग दरभंगा, मधुबनी समेत कमिश्नरी के कई इलाकों में रही और करीब 36 सालों की सेवा के बाद वारिसनगर प्रखंड से रिटायर हुए. उनके अनुसार पहले शिक्षा सेवा और संस्कार का माध्यम थी.
एस.एन. ठाकुर का मानना है कि आज शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक, स्मार्ट क्लास और ऑनलाइन पढ़ाई जैसी सुविधाएं है जो पहले नहीं थी. इसके बावजूद उन्हें लगता है कि पहले गुरु और शिष्य के बीच जो सम्मान, अपनापन और अनुशासन था वह अब काफी कम हो गया है. उन्होंने कहा कि पहले छात्र अपने टीचर्स को आदर्श मानते थे और मेहनत के दम पर आगे बढ़ते थे. आज मौके ज्यादा हैं, लेकिन शिक्षा का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



