Jimikand Farming: प्रगतिशील किसान शिवकुमार मौर्य ने बताया कि पहले वे गेहूं और धान जैसी पुरानी फसलें उगाते थे. इनसे कमाई तो होती थी. लेकिन खर्च निकालने के बाद बचत बहुत कम बचती थी. इसी वजह से उन्होंने कुछ नया करने का सोचा और जिमीकंद की खेती शुरू कर दी. शिवकुमार मौर्य ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने थोड़ी सी जमीन पर जिमीकंद लगाया था. फसल बहुत अच्छी हुई और बाजार में भी बढ़िया दाम मिला. इससे उनका हौसला बढ़ा और अब उन्होंने इसकी खेती का रकबा (खेती का क्षेत्र) बढ़ा दिया है.
लोकल 18 से बात करते हुए प्रगतिशील किसान शिवकुमार मौर्य ने बताया कि पहले वे गेहूं और धान जैसी पुरानी फसलें उगाते थे. इनसे कमाई तो होती थी. लेकिन खर्च निकालने के बाद बचत बहुत कम बचती थी. इसी वजह से उन्होंने कुछ नया करने का सोचा और जिमीकंद की खेती शुरू कर दी. शिवकुमार मौर्य ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने थोड़ी सी जमीन पर जिमीकंद लगाया था. फसल बहुत अच्छी हुई और बाजार में भी बढ़िया दाम मिला. इससे उनका हौसला बढ़ा और अब उन्होंने इसकी खेती का रकबा (खेती का क्षेत्र) बढ़ा दिया है.
पूरे साल रहती है जिमीकंद की मांग
शिवकुमार के मुताबिक जिमीकंद की मांग पूरे साल बनी रहती है. इसे सब्जी के तौर पर तो इस्तेमाल किया ही जाता है. साथ ही कई और खाने-पीने की चीजों में भी इसका उपयोग होता है. यही वजह है कि किसानों को इसे बेचने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती. शिवकुमार अभी लगभग 1 बीघा जमीन पर जिमीकंद की खेती कर रहे है और भविष्य में इसे और बढ़ाने की योजना है.
कितनी लगी लागत और कितना होगा मुनाफा?
शिवकुमार मौर्य बताते है कि 1 बीघा जिमीकंद की खेती में करीब 20 से 22 हजार रुपये का खर्च आता है. उन्होंने बताया कि अगर फसल अच्छी रही तो 1 बीघा में लगभग 24 से 25 क्विंटल जिमीकंद पैदा होने की उम्मीद है और इससे लाखों रुपये की कमाई हो सकती है. जिमीकंद की खेती के लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए और सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. समय-समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार (जंगली घास) को हटाने से फसल अच्छी होती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
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