मथुरा को मामा कंस की नगरी के नाम से जाना जाता है. मथुरा के साथ-साथ गोकुल, बलदेव, नंदगांव, बरसाना, गोवर्धन और वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की बाल्य काल अवस्था की लीला स्थली में सुमार है. प्राचीन समय और द्वापर युग से ही भगवान की लीला स्थली का गुणगान होता चला आ रहा है. कलयुग में भी श्रीकृष्ण और उनके सखाओं द्वारा की गई लीलाएं आज भी यहां देखने को मिलती हैं. वहीं वृंदावन को धर्म और तीर्थ नगरी के नाम से जाना जाता है.
मथुरा: द्वापर युग से ही यमुना मथुरा में प्रवाहित होती हैं, जो उस काल की कृष्ण की लीलाओं को याद दिलाता है. मान्यता है कि द्वापर युग में यमुना में एक कालिया नाम का नाग रहता था. यह सांप इतना विषैला था कि पशु, पक्षी या इंसान यमुना जल को छू भी लेता था तो उसकी मृत्यु हो जाती थी. कृष्ण ने यमुना से उसे नाग को बाल लीला के माध्यम से के दिया और युद्ध जब हुआ तो कालिया नाग की पत्नियों ने रम की भीख मांग कर भगवान कृष्ण से नाग को बचा लिया. यह वचनबद्ध कर दिया कि वह हमेशा के लिए यमुना जी को छोड़कर वृंदावन से चला जाएगा.
कृष्ण की लीलाओं की गवाह है यमुना नदी
उत्तर प्रदेश के मथुरा को मामा कंस की नगरी के नाम से जाना जाता है. मथुरा के साथ-साथ गोकुल, बलदेव, नंदगांव, बरसाना, गोवर्धन और वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की बाल्य काल अवस्था की लीला स्थली में सुमार है. प्राचीन समय और द्वापर युग से ही भगवान की लीला स्थली का गुणगान होता चला आ रहा है. कलयुग में भी श्रीकृष्ण और उनके सखाओं द्वारा की गई लीलाएं आज भी यहां देखने को मिलती हैं. वहीं वृंदावन को धर्म और तीर्थ नगरी के नाम से जाना जाता है.
वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण का आज भी वह रहस्य छुपा हुआ है, जो द्वापर युग में उनके द्वारा लीलाएं की गईं. वृंदावन की यमुना नदी के किनारे कालीदह नामक स्थान पर एक ऐसा रहस्य और भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ. किस्सा आज भी लोगों को देखने और सुनने को मिलता है. जिससे द्वापर युग की यादें लोगों के जहां में ताजा हो जाती हैं.
जाने से डरते थे लोग
कालीदह एक ऐसा स्थान जहां जाने से द्वापर युग में लोग डरते थे. एक ऐसे विषैले सांप का डर लोगों के अंदर बैठा हुआ था, जो लोगों को जहर ही नहीं बल्कि अपने अनंत फनो से डरा कर मार देता था. भगवान कृष्ण को जब यह पता चला कि यहां उनकी प्यारी गए यमुना जल पान करने के लिए आती हैं. यमुना जल विषैला होने के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ती है, तो उन्होंने इस स्थान पर एक लीला का द्वापर युग में मंचन किया. कालिया दमन मंदिर की पुजारी कन्हैया ने लोकल 18 से बातचीत की. लोकल 18 को मान्यता के बारे में और यहां के रहस्य की विस्तार पूर्वक जानकारी दी.
कन्हैया ने बताया कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपने मित्रों के साथ खेलने के लिए आया करते थे. इसी स्थान पर कालिया नाग नामक एक विशाल नाग रहता था अपने परिवार के साथ. यमुना का जल पूरा विषैला उसे कालिया नाग के विष से हो चुका था. पशु, पक्षी, जीव, जंतु या मनुष्य उस जल को ग्रहण करता था तो वह मृत्यु को प्राप्त हो जाता था. भगवान कृष्ण ने यहां गेंद लीला कर कालिया नाग के उस प्रकोप से वृंदावन वासियों को मोक्ष दिलाया. उन्होंने कहा कि कालिया नाग का दमन करने के बाद भगवान कृष्ण ने उसके परिवार और उससे वचन लिया था कि वह यमुना में कभी लौटकर नहीं आएगा.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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