IITian Story: क्या करियर में ग्रोथ का मतलब सिर्फ शानदार पैकेज हासिल करना है? आईआईटी रुड़की की ग्रेजुएट स्नेहा प्रिया ने गुरुग्राम की 32 लाख रुपये सालाना की नौकरी को सिर्फ इसलिए ठुकरा दिया कि वह बेंगलुरु में रह सके. जानिए इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस क्यों छिड़ गई है.
IITian Story Viral Post: इस डेटा साइंटिस्ट ने 32 लाख रुपये सालाना का जॉब ऑफर ठुकरा दिया
‘गुरुग्राम को ना और बेंगलुरु को हां’ के पीछे की कहानी
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पैसों से बड़ी थी सुकून की शर्त
स्नेहा ने गुस्से या जल्दबाजी में यह फैसला नहीं लिया है. उन्होंने अपने पर्सनल अनुभव और सिक्योरिटी को इस फैसले की वजह बताया. आईआईटी रुड़की में पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई बार दिल्ली-एनसीआर का दौरा किया था. उनके मुताबिक, वहां के अनुभव बहुत अच्छे या सुखद नहीं रहे थे. एक महिला के तौर पर सुरक्षा को लेकर उनके मन में कुछ शंकाएं थीं. वहीं, बेंगलुरु में उन्हें हमेशा एक खास तरह की गर्मजोशी, सिक्योरिटी और ‘अपने घर’ जैसा अहसास मिला, जिसे वह किसी भी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती थीं.
सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस
स्नेहा प्रिया की यह पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर दो अलग-अलग विचार वाले लोग एक्टिव हो गए. जहां बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग और युवा स्नेहा के इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता, खुद की सेफ्टी और मेंटल पीस सबसे पहले है. वहीं, कुछ लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या इतनी कम उम्र में करियर के इतने बड़े और आकर्षक मौके छोड़ना सही है?
बदल रही है युवा प्रोफेशनल की सोच
यह कहानी इस बात की गवाह है कि अब भारत के कॉर्पोरेट जगत और युवाओं की सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है. आज की नई पीढ़ी सिर्फ बैंक बैलेंस देखकर नौकरी नहीं चुन रही है, बल्कि उनके लिए वर्क-लाइफ बैलेंस, सुरक्षित माहौल और खुश रहना भी उतना ही जरूरी हो गया है. स्नेहा प्रिया की कहानी याद दिलाती है कि कामयाबी की परिभाषा सिर्फ सैलरी स्लिप तय नहीं करती, बल्कि वो जिंदगी तय करती है जो आप हर रोज जीते हैं.
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