1. खगोलीय सच: कोई ठोस ग्रह नहीं हैं राहु और केतु
खगोल विज्ञान (Astronomy) के नजरिए से देखें, तो अंतरिक्ष में मंगल, बुध या शनि की तरह ‘राहु’ और ‘केतु’ नाम का कोई भौतिक या ठोस ग्रह नहीं है।
गणितीय बिंदु (Mathematical Nodes): पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है और चंद्रमा पृथ्वी के। अंतरिक्ष में जिस दो बिंदुओं पर चंद्रमा और पृथ्वी की कक्षाएं (Orbits) एक-दूसरे को काटती हैं, उन इमेजिनरी इंटरसेक्शन पॉइंट्स (Intersection Points) को ज्योतिष में ‘राहु’ और ‘केतु’ कहा गया है।
ग्रहण का कारण: जब सूर्य या चंद्रमा इन बिंदुओं के पास आते हैं, तभी सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण होता है। चूंकि ये बिंदु सूर्य की रोशनी को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए इन्हें ‘छाया ग्रह’ (Shadow Planets) कहा गया।
2. राहुकाल का गणित: यह कैसे तय होता है?
- राहुकाल कोई अंधाधुंध चुना गया समय नहीं है, इसके पीछे एक सटीक गणितीय गणना (Mathematical Calculation) है:
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक के पूरे दिन को 8 बराबर भागों में बांटा जाता है। उदाहरण के लिए, अगर दिन 12 घंटे का है, तो हर भाग 1.5 घंटे (90 मिनट) का होगा।
- सप्ताह के सात दिनों में, पहले भाग (सूर्योदय का शुरुआती समय) को छोड़कर बाकी के 7 भागों में राहुकाल का पहर बदलता रहता है। जैसे सोमवार को यह दूसरे भाग में होता है, तो शनिवार को तीसरे भाग में।
- सिर्फ दिन में: राहुकाल केवल दिन के समय मान्य होता है, रात के समय राहुकाल की गणना नहीं की जाती।
3. ऊर्जा का खेल या अंधविश्वास? (The Energy Dynamics)
इसे अंधविश्वास की जगह ‘ऊर्जा के असंतुलन’ के नजरिए से समझा जा सकता है:
नकारात्मक प्रभाव: वैदिक विज्ञान के अनुसार, राहुकाल के दौरान सौरमंडल में कॉस्मिक किरणें (Cosmic Rays) और चुंबकीय ऊर्जा (Magnetic Energy) कुछ इस तरह विचलित होती हैं कि इसका सीधा असर इंसानी दिमाग और निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making) पर पड़ता है।
अशुभ नहीं, ‘भटकाव’ का समय: राहु का स्वभाव है ‘भ्रम’ (Illusion) पैदा करना। माना जाता है कि इस 90 मिनट की अवधि में व्यक्ति का मानसिक संतुलन थोड़ा अस्थिर हो सकता है, जिससे गलत फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए इस समय नए और महत्वपूर्ण कामों को शुरू करने से मना किया जाता है, ताकि नुकसान न हो।
4. राहुकाल क्या है?
परिभाषा: राहु एक अशुभ छाया ग्रह है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बांटने पर, जिस 90 मिनट (डेढ़ घंटे) के भाग पर राहु का आधिपत्य होता है, उसे राहुकाल कहते हैं।
नियम: यह स्थान और सूर्योदय के समय के अनुसार बदलता है। राहुकाल केवल दिन में मान्य होता है, रात में नहीं। इसका विशेष प्रभाव रविवार, मंगलवार और शनिवार को होता है।
दिनों के अनुसार राहुकाल का समय (यदि सूर्योदय सुबह 6 बजे हो)
सोमवार: सुबह 7.30 से 9.00 बजे तक
शनिवार: सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक
शुक्रवार: सुबह 10.30 से दोपहर 12.00 बजे तक
बुधवार: दोपहर 12.00 से 1.30 बजे तक
गुरुवार: दोपहर 1.30 से 3.00 बजे तक
मंगलवार: दोपहर 3.00 से शाम 4.30 बजे तक
रविवार: शाम 4.30 से 6.00 बजे तक
राहुकाल में क्या न करें?
प्रतिबंधित कार्य: विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञ या कोई भी मांगलिक कार्य न करें।
लेन-देन व व्यापार: नया बिजनेस शुरू न करें, लिखा-पढ़ी, बहीखाता या कीमती सामान (मकान, वाहन, मोबाइल, गहने) की खरीद-बिक्री से बचें।
यात्रा: किसी जरूरी या घूमने के काम के लिए यात्रा की शुरुआत इस समय न करें।
मान्यता: इस काल में शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आती हैं, अत्यधिक प्रयास करने पड़ते हैं या वे अधूरे रह जाते हैं।
राहुकाल के अचूक उपाय
यदि इस समय कोई जरूरी काम या यात्रा करना अनिवार्य हो, तो ये उपाय करें:
यात्रा के लिए: घर से निकलने से पहले पान, दही या कुछ मीठा खाएं और पहले 10 कदम उल्टे (पीछे की ओर) चलें।
शुभ कार्य के लिए: कार्य शुरू करने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें और पंचामृत ग्रहण करें।
5. आधुनिक दृष्टिकोण: राहुकाल को कैसे देखें?
- आज के दौर में इसे अंधविश्वास मानकर डरने की बजाय एक ‘टाइम मैनेजमेंट’ और ‘पॉज़ (Pause) बटन’ की तरह देखा जा सकता है:
- यह ‘नो-गो’ ज़ोन नहीं है: राहुकाल का मतलब यह नहीं है कि आपकी जिंदगी रुक जाए। जो काम पहले से चल रहे हैं (रूटीन वर्क), उन पर राहुकाल का कोई असर नहीं होता।
- आत्मचिंतन का समय: जैसे हम हर वक्त भागते रहते हैं, वैसे ही राहुकाल को दिन का एक ऐसा ब्रेक माना जा सकता है जहाँ आपको रुककर, सोच-समझकर कदम बढ़ाना चाहिए।
- मानसिक दृढ़ता: यदि आपका इरादा पक्का है और आपकी योजना मजबूत है, तो मनोवैज्ञानिक रूप से कोई भी काल आपको प्रभावित नहीं कर सकता।
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