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मानसून की शुरुआत के साथ ही दिल्ली में जर्जर इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ गया है। नगर निगम (एमसीडी) के ताजा भवन सुरक्षा सर्वेक्षण में राजधानी के कई पुराने और कमजोर भवनों की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। सर्वे में 27 इमारतों को अत्यंत जर्जर और लोगों के लिए खतरनाक घोषित किया गया है, जबकि 125 भवन ऐसे पाए गए हैं जिन्हें तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। एमसीडी ने इन भवनों के मालिकों और निवासियों को नोटिस जारी कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

एमसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष 32,55,909 भवनों को सर्वे के दायरे में रखा गया था। इनमें से 29,94,179 भवनों का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 27 भवनों की संरचना इतनी कमजोर पाई गई कि उन्हें रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया गया। वहीं, 125 भवनों को मरम्मत योग्य श्रेणी में रखा गया है और उनके मालिकों को जल्द से जल्द सुधार कराने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुरानी दिल्ली और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थिति सबसे अधिक गंभीर है। विशेष रूप से सिटी-सदर पहाड़गंज जोन में कई पुराने भवन बेहद खराब हालत में मिले हैं। दशकों पुराने मकान, संकरी गलियां और बढ़ता निर्माण दबाव इन क्षेत्रों में मानसून के दौरान हादसों का जोखिम बढ़ा देता है।

एमसीडी ने खतरनाक घोषित इमारतों के मालिकों और वहां रहने वाले लोगों को तत्काल भवन खाली करने के निर्देश दिए हैं। जिन भवनों से तत्काल खतरा था, उन्हें सील भी किया गया है। निगम ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर संबंधित भवन मालिकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिन भवनों की मरम्मत संभव है, उनके मालिकों को मानसून के दौरान किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए तत्काल आवश्यक मरम्मत कराने को कहा गया है। करोल बाग, पश्चिमी दिल्ली समेत अन्य जोनों में भी भवन मालिकों को अपने खर्च पर मरम्मत कराने के लिए अलग से पत्र भेजे गए हैं।

दिल्ली में हर वर्ष बारिश के मौसम में जर्जर मकानों की दीवारें और छज्जे गिरने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में एमसीडी का यह सर्वे खतरे की आशंका वाले भवनों की समय रहते पहचान कर जनहानि रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि निर्देशों का पालन नहीं करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ भवन खाली कराने, सील करने और अन्य कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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