साल 1985 में सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म ने दस्तक दी,जिसने बॉक्स ऑफिस पर कई रिकॉर्ड दर्ज किए. फिल्म के लिए विनोद खन्ना का नाम फाइनल हुआ. लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई तो उसमें धर्मेंद्र नजर आए. मेकर्स का ये फैसला सही साबित हुआ और फिल्म के एक गाने तो इतिहास ही रच दिया.
नई दिल्ली. यूं तो धर्मेंद्र की इंडस्ट्री में अपनी एक अलग धाक रही है. लेकिन साल 1985 में वह एक ऐसी फिल्म में नजर आए थे, जिसमें पहले विनोद खन्ना को कास्ट किया गया था. लेकिन बाद में फिल्म के हीरो धर्मेंद्र बने. उन्होंने अपनी दमदार एक्टिंग से न सिर्फ फिल्म को हिट बनाया, बल्कि मेकर्स के फैसले को भी सही साबित किया.
हम जिस मशहूर फिल्म की बात कर रहे हैं, उसका नाम है, ‘गुलामी’. साल 1985 में जब ये फिल्म रिलीज हुई तो, उस दौर की 10 सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में शामिल हुई.फिल्म गुलामी में 9वें स्थान पर रही.
साल 1985 में फिल्मों की कमाई के हिसाब से काफी शानदार साबित हुआ था. ये साल फिल्मों के लिए काफी लकी रहा. इनमें पहले सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी, मंदाकिनी और राजीव कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’.फिल्म के गानों ने भी धमाल मचा दिया था. दूसरे नंबर पर थी मर्द, जिसने 8 करोड़ 50 लाख रुपए कमाकर इतिहास रच दिया. तीसरे पर मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘प्यार झुकता नहीं’. फिल्म में पद्मिनी के साथ उनकी जोड़ी काफी हिट हुई थी.
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बात अगर गुलामी फिल्म की करें तो फिल्म बनने का काम तो साल 1980 में ही शुरु हो गया था. फिल्म के लिए उस वक्त विनोद खन्ना का नाम फाइनल किया गया. लेकिन बीच में ही उसी दौरान विनोद खन्ना जी ने इंडस्ट्री छोड़ दी और सन्यास ले लिया.
इसके बाद ये फिल्म तब जाकर धर्मेंद्र के हाथ आई. लेकिन फिल्म को लेकर काफी दिक्कते चल रही थीं. कई बार तो बजट को लेकर फिल्म का काम रुक गया था. कई बार तो ऐसे हालांत हो गए थे कि धर्मेंद्र और मिथुन ने तो अपनी अपनी फीस तक नहीं लेने का ऐलान कर दिया था.
बाद में किसी तरह जब फिल्म बनी तो रिलीज के बाद फिल्म ने दर्शकों का ऐसा दिल जीता कि फिल्म हिट साबित हुई. फिल्म की कहानी ने लोगों को दिलों पर कबजा कर लिया था. फिल्म के गाने तो आज भी लोगों की जुबां पर है.
फिल्म के एक सीन को लेकर विवाद भी खूब हुआ, जिसमें दिखाया गया कि नन्हें धर्मेंद्र को ठाकुर सजा देता है, क्योंकि उनकी मां बिना जूते उतारे ठाकुर की हवेली में एंट्री कर लेती है. ये देख ठाकुर नाराज हो जाता है और धर्मेंद्र की मां से जूते उतारकर अपने सिर पर रखने की बात कह देता है. इस सीन पर ठाकुरों ने खूब विवाद किया था.
कहा गया था कि फिल्म के इस सीन के जरिए ठाकुरों की छवि खराब की जा रही है. राजस्थान की कुछ जगहों पर तो काफी दंगे भड़क उठे थे. फिल्म हिट तो हुई थी, साथ ही समीक्षकों ने भी इस फिल्म की खूब सराहना की थी. फिल्म की वजह से डायरेक्टर जे.पी.दत्ता की खूब तारीफें हुईं.
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