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बहराइच के बशीरगंज स्थित भास्कर मंदिर धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां हर महीने दोनों एकादशी पर विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है, जबकि नवरात्रि के दौरान मंदिर का आध्यात्मिक और भव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है.

सिद्धनाथ मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी रवि गिरी महाराज के अनुसार, इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की स्थापना धर्मराज युधिष्ठिर ने की थी. मान्यता है कि महाभारत काल में पांचों पांडव यहां आकर भगवान शिव की आराधना करते थे. शहर के बीचों-बीच घंटाघर के पास स्थित यह प्राचीन मंदिर लगभग 5,000 वर्ष पुराना माना जाता है. ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ यह मंदिर गहरी धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र है, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

बहराइच जिले के जैतापुर के प्रसिद्ध बाजार के पास स्थित श्री वृद्ध मातेश्वरी माता घुरदेवी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि यह मंदिर खुदाई के दौरान स्वयं पिंडी के रूप में प्रकट हुआ था. मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित कहानी मोहम्मद अली की है, जिनका दावा है कि यहां चढ़ाए गए पवित्र नीर को आंखों पर लगाने से उनकी खोई हुई रोशनी लौट आई. इस घटना के बाद उनकी माता घुरदेवी में अटूट आस्था हो गई और वह पिछले 18 वर्षों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं. वर्तमान में वह मंदिर के अध्यक्ष हैं और उनकी सेवा व समर्पण हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल माने जाते हैं.

शहर के सलारगंज मोहल्ले में रेलवे लाइन के पास स्थित गुल्लाबीर मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि महाभारत काल में एक वर्ष के अज्ञातवास के दौरान पांडव इसी स्थान पर ठहरे थे. मंदिर में भगवान हनुमान चौरे के रूप में विराजमान हैं और उन्हें 84 कोस का कोतवाल भी कहा जाता है. यहां समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते रहते हैं, जबकि होली के बाद लगने वाला ‘आठे का मेला’ विशेष आकर्षण का केंद्र होता है. श्रद्धालु इस मंदिर में मुंडन संस्कार, अन्नप्राशन और विवाह के बाद नवदंपति के पूजन जैसे शुभ संस्कार भी संपन्न कराते हैं.

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बहराइच शहर के बाहरी हिस्से में सरयू नदी के किनारे झिगहा घाट के पास स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां स्थापित भगवान हनुमान की 39 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा दूर-दूर से आने वाले भक्तों को आकर्षित करती है. विशेष रूप से मंगलवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और मंदिर परिसर मेले जैसा नजर आता है. मंदिर के पुजारी के अनुसार, इस प्रतिमा का निर्माण बंगाल के कुशल कारीगरों ने करीब चार वर्षों में पूरा किया था. उनका कहना है कि मंदिर निर्माण के लिए तत्कालीन महाराज ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर तक बेच दी थी, जिसके बाद इस धार्मिक स्थल के निर्माण का कार्य शुरू हो सका.

बहराइच शहर के डिगीहा तिराहे के पास स्थित मां संहारणि देवी मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस सिद्धपीठ में माता चंडी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सोमनाथ मंदिर पर हुए आक्रमण के समय इस मंदिर की स्थापना की गई थी. वहीं, लोककथाओं में उल्लेख मिलता है कि महाराजा सुहेलदेव ने मुगल सेना (स्थानीय परंपराओं में वर्णित) से युद्ध से पहले यहां खड्ग पूजन और तांत्रिक विधि से मां संहारणि की आराधना कर विजय का आशीर्वाद प्राप्त किया था. भक्तों का विश्वास है कि मां काली की सच्चे मन से पूजा करने पर रुके हुए कार्य पूरे होते हैं, इसलिए यहां वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

बहराइच मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर सरयू नदी के तट पर स्थित यह ऐतिहासिक इमारत अपनी अनोखी बनावट के कारण ‘भूलभुलैया’ के नाम से प्रसिद्ध है. लगभग 400 वर्ष पुरानी मानी जाने वाली इस आलीशान संरचना का एक हिस्सा सरयू नदी के भीतर होने के बावजूद इसकी दीवारें आज भी मजबूती से खड़ी हैं, जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस इमारत का निर्माण गंगवल स्टेट की रानी ने कराया था. इमारत के मध्य स्थित प्राचीन मंदिर में आज भी नियमित पूजा-अर्चना होती है और पुजारी यहां निवास करते हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इसी मंदिर की दिव्य शक्ति के कारण यह ऐतिहासिक इमारत आज तक सुरक्षित बनी हुई है. सावन माह में यहां विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

बहराइच शहर के बाहरी क्षेत्र डिहवा के जंगलों के बीच स्थित महमदा समय शक्तिपीठ मंदिर रहस्य, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम है. बहराइच-रुपईडीहा रेलवे लाइन इसी मंदिर परिसर के पास से गुजरती है, जो इसकी विशेष पहचान मानी जाती है. घने जंगलों और हरियाली से घिरे इस शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है. नवरात्रि के दौरान बहराइच सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना करते हैं. वहीं सामान्य दिनों में भी लोग दर्शन के साथ कुछ समय प्राकृतिक वातावरण में बिताने के लिए यहां आते हैं. स्थानीय मान्यताओं के कारण यह मंदिर अपने रहस्यमय इतिहास और चमत्कारों की कथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है.

बहराइच शहर के बशीरगंज क्षेत्र में गुदरी रोड पर स्थित भास्कर मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में प्रत्येक माह आने वाली दोनों एकादशी पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें महिलाएं भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ में पूरे उत्साह के साथ भाग लेती हैं. मुख्य सड़क के किनारे स्थित होने के बावजूद मंदिर परिसर में हमेशा शांत और आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है. वहीं, नवरात्रि के दौरान यहां की सजावट, धार्मिक अनुष्ठान और श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर की भव्यता को और भी आकर्षक बना देती है.

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