अभिषेक बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत ही फ्लॉप फिल्म से की थी. इसके बाद उन्होंने कई ऐसे रोल किए जो शायद उन्हें नहीं करने चाहिए थे. एक्टिंग की दुनिया में 26 साल पूर कर चुके अभिषेक को उस वक्त यही डर सताता था कि पता नहीं काम मिलेगा या नहीं, इसलिए जो काम मिलता था, वह कर लेते थे. लेकिन अब वह ऐसा नहीं करेंगे.
नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन का बेटा होने मात्र से अगर अभिषेक को काम मिल जाता, तो कभी ये गलती नहीं दोहराते.ऐसा हम नहीं खुद अभिषेक बच्चन का कहना है कि उन्होंने करियर की शुरुआत में काम न मिलने के डर से कई जो काम मिलता था, कर लेते थे. लेकिन अब वह ये गलती नहीं दोहराएंगे.
26 साल से अभिषेक बच्चन इंडस्ट्री में अपनी जड़े जमाए हुए हैं. अपने करियर की शुरुआत से ही वह काफी उतार चढ़ाव देखते आ रहे हैं. उन्होंने कई फिल्मों में सपोर्टिंग रोल भी निभाए हैं. लेकिन अब आकर उन्होंने खुलासा किया है कि शुरुआत में उन्हें काम मिलने की टेंशन रहती थी, जो मिला वही कर लिया करते थे.
बॉलीवुड में 26 साल पूरे कर चुके अभिषेक बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत करीना कपूर के साथ फिल्म रिफ्यूजी से की थी. लेकिन उनकी ये फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी. अब उन्होंने अपने शुरुआती दौर को याद किया है.
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उनका कहना है कि डेब्यू के वक्त उन्हें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की रहती थी कि उन्हें काम मिलेगा या नहीं. यही वजह थी कि उस वक्त जो भी काम मिलता था वह कर लिया करते थे. उसे करने के लिए तैयार हो जाते थे.
अभिषेक ने ETimes को दिए इंटरव्यू में खुलासा करते हुए बताया कि अब वह अपने काम के पैटर्न को पूरी तरह बदल चुके हैं. अब वह कैमरे के सामने काफी कंफर्टेबल फील करते हैं, हालांकि शुरुआत में वह काफी घबराए रहते थे.
बता दें कि अभिषेक बच्चन ने अपने करियर में कई ऐसे रोल भी निभाए हैं, जो लोगों के जहन में बस गए. इनमें ‘गुरु’ जैसी कई फिल्में हैं. जल्द ही वह सिद्धार्थ आनंद की फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे. फिल्म में उनके अलावा शाहरुख खान, सुहाना खान, दीपिका पादुकोण, रानी मुखर्जी, अरशद वारसी और अक्षय ओबेरॉय भी अहम भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं.
जूनियर बच्चन का कहना है कि अब वह जान गए हैं कि उनके लिए कौन सा काम सही है. किस काम के लिए उन्हें हामी देनी है और किस काम को रिजेक्ट करना है.अब वह ये भी नहीं सोचते कि बाकी एक्टर की तरह सफल होना है,या उनकी सक्सेस उन्हें परेशान नहीं करती.
अगर शूटिंग लोकेशंस पर लोग शूटिंग देखने पहुंच जाते थे, तो वह नर्वस हो जाते थे कि मैं कैसे एक्टिंग करूं. जब इंसान में ये कॉन्फिडेंस आ जाती है, तो वह अपने फैसले भी खुद लेने में परफेक्ट हो जाता है.
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