कन्नड़ फिल्ममेकर इंद्रजीत लंकेश ने दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट वाली मांग का समर्थन किया है. उनका कहना है कि दीपिका ने सिर्फ कामकाजी मांओं के लिए ही नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के हर कलाकार और हर महिला के लिए आवाज उठाई है.
नई दिल्ली. दीपिका पादुकोण हमेशा उन मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखती हैं जो उन्हें जरूरी लगते हैं. हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में 8 घंटे की शिफ्ट की बात कही, जिसके बाद वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस शुरू हो गई. अब इस मुद्दे पर कई लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं. इन्हीं में कन्नड़ फिल्ममेकर और पत्रकार इंद्रजीत लंकेश भी शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कन्नड़ फिल्म से दीपिका को लॉन्च किया था.
इंद्रजीत लंकेश का मानना है कि कलाकारों, खासकर मां बनने के बाद काम कर रही अभिनेत्रियों के लिए तय और संतुलित काम के घंटे बहुत जरूरी हैं. उनका कहना है कि शूटिंग का शेड्यूल कलाकारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाना चाहिए, न कि उनसे लगातार लंबे समय तक काम करवाया जाए.
उन्होंने कहा, ‘अगर आप दीपिका जैसी कलाकार के साथ 6 घंटे शूटिंग कर लेते हैं, तो उसके बाद बाकी 4 घंटे दूसरे सीन शूट किए जा सकते हैं. निर्देशक कैमरे के पीछे होता है, इसलिए वह अपना काम जारी रख सकता है. लेकिन कलाकार लगातार कैमरे के सामने नहीं रह सकता. लंबे समय तक शूटिंग करने से उसके चेहरे पर थकान साफ दिखाई देने लगती है. इसलिए शूटिंग की सही प्लानिंग होनी चाहिए और कलाकारों को बीच-बीच में आराम भी मिलना चाहिए.’
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उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई कलाकार मां है, तो उसके लिए अपने बच्चे के साथ समय बिताना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. बच्चे की देखभाल कोई और कर सकता है, लेकिन मां का प्यार और साथ कोई नहीं दे सकता.
दीपिका की तारीफ करते हुए इंद्रजीत लंकेश ने कहा, “दीपिका ने 8 घंटे की शिफ्ट की बात उठाकर बहुत अच्छा काम किया है. उन्होंने हर महिला और हर कलाकार के लिए आवाज उठाई है. कैमरे के सामने कलाकार होता है और अगर वह 8 घंटे से ज्यादा काम करेगा, तो उसकी थकान चेहरे पर नजर आएगी. दर्शक उसी चेहरे को स्क्रीन पर देखते हैं. निर्देशक कैमरे के पीछे होता है, लेकिन कलाकार की थकान छिप नहीं सकती.
उन्होंने कहा कि बाद में यही कलाकार सवालों का सामना करते हैं कि वे थके हुए क्यों दिख रहे हैं, उम्रदराज़ क्यों लग रहे हैं या अपना बेस्ट परफॉर्मेंस क्यों नहीं दे पा रहे हैं. इसलिए कलाकारों के लिए 8 घंटे की शिफ्ट बिल्कुल सही है.
इंद्रजीत लंकेश का मानना है कि अभिनय किसी कॉर्पोरेट नौकरी से कहीं ज्यादा मुश्किल और शारीरिक मेहनत वाला काम है. उन्होंने कहा, ‘मेरे हिसाब से तो कलाकारों के लिए 6 घंटे की शिफ्ट होनी चाहिए. ऑफिस में 8 घंटे काम करना अलग बात है. वहां लोग चाय-कॉफी पीते हैं, थोड़ा आराम करते हैं और फिर काम शुरू कर देते हैं. लेकिन कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता. कैमरे के सामने आपकी हर थकान नजर आती है. इसलिए कलाकारों को 6 से 7 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना चाहिए, खासकर अगर वह एक मां हैं.’
दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट वाली मांग अब फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी चर्चा का विषय बन चुकी है. कई लोग इसे कामकाजी मांओं और कलाकारों के लिए बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की दिशा में जरूरी कदम मान रहे हैं. इंद्रजीत लंकेश का कहना है कि तय काम के घंटे न सिर्फ कलाकारों की परफॉर्मेंस बेहतर बनाएंगे, बल्कि उन्हें अपनी निजी जिम्मेदारियां निभाने का भी पूरा मौका देंगे.
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