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द्वारका के सेक्टर-24 स्थित श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 2021 से यहां रोजमर्रा का संचालन संभाल रही द्वारका के श्री गुरु सिंह सभा (पंजीकृत) को अब दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ओर से कथित परिसर तुरंत खाली करने का नोटिस दिया गया है। 

संस्था का दावा है कि श्मशान घाट का प्रबंधन अब किसी अन्य एनजीओ को सौंपा जा रहा है। सभा के अनुसार, परिसर में कई जनसुविधाएं शुरू की गईं। उनका दावा है कि अंतिम यात्रा वैन की मुफ्त सेवा, शवों के लिए डीप फ्रीजर, जरूरतमंदों और सैनिकों के लिए निशुल्क दाह संस्कार व्यवस्था, पेयजल सुविधा, नए घाट का निर्माण, अस्थि गृह, बागवानी, शेड और बैठने की व्यवस्था शामिल हैं।

श्री गुरु सिंह सभा के सचिव दविंदर पाल सिंह ने इस मामले को लेकर ऑल द्वारका रेजिडेंट्स फेडरेशन (एडीआरएफ) के अध्यक्ष अजीत स्वामी को पत्र लिखा है। पत्र में संस्था ने बताया कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में श्मशान घाट पर कई सुविधाएं विकसित की हैं। साथ ही, सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया है। 

संस्था ने पत्र में यह भी कहा कि उन्होंने स्थानीय निवासियों और एडीआरएफ के सुझावों को लागू करने का प्रयास किया, लेकिन अब उन्हें अचानक परिसर खाली करने का आदेश मिला है, जिससे वे आश्चर्य और असंतोष में हैं। दविंदर पाल सिंह का कहना है कि यह फैसला बिना स्पष्ट कारण के लिया गया है। साथ ही, प्रबंधन किसी अन्य एनजीओ को सौंपने की बात सामने आ रही है। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

कोविड काल में सेवा भाव और समर्पण के साथ किया

एडीआरएफ ने एमसीडी के उस फैसले पर चिंता जताई है, जिसमें 2021 से श्मशान घाट का संचालन कर रही द्वारका के श्री गुरु सिंह सभा से प्रबंधन वापस लेकर किसी अन्य संस्था को सौंपने की बात कही गई है। एडीआरएफ के अध्यक्ष अजीत स्वामी ने कहा कि प्रशासन को इस मुद्दे पर जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उचित और संतुलित निर्णय लेना चाहिए। एडीआरएफ का कहना है कि कोविड काल सहित पिछले कई सालमें श्री गुरु सिंह सभा ने इस श्मशान भूमि का संचालन सेवा भाव और समर्पण के साथ किया है। इस दौरान परिसर की साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया गया।

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