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खरीफ सीजन में धान की नर्सरी का अचानक पीला पड़ना किसानों के लिए बड़ा संकट बन गया है. मिट्टी में लोहा-नाइट्रोजन की कमी और अत्यधिक जलभराव इसका मुख्य कारण है. हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसका तोड़ निकाल लिया है; प्रति एकड़ 0.5% फेरस सल्फेट और 1% यूरिया के घोल का छिड़काव कर मात्र 3 दिनों में पौध को फिर से हरा-भरा किया जा सकता है.

शाहजहांपुर: खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही धान की रोपाई शुरू हो चुकी है. ऐसे में अगर आपकी धान की नर्सरी यानी पौध अचानक पीली पड़ रही है, तो सावधान हो जाइए. एक्सपर्ट का कहना है कि यह पीलापन आपकी पूरी फसल को तबाह कर सकता है. मुख्य रूप से यह मिट्टी में ‘लोहा या नाइट्रोजन’ की भारी कमी का संकेत है. इसके अलावा, खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होना भी इस समस्या को बुलावा दे रहा है. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, कृषि एक्सपर्ट ने इसका बेहद आसान और असरदार इलाज ढूंढ निकाला है, जिससे आपकी पौध फिर से लहला उठेगी.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी में पीलापन आना एक गंभीर समस्या है, जिसे किसान अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. जब मिट्टी में नाइट्रोजन या लोहा की कमी होती है, तो पौधों में क्लोरोफिल नहीं बन पाता और पत्तियां पीली होने लगती हैं. लगातार जलभराव से जड़ें सांस नहीं ले पातीं, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण रुक जाता है. इसकी तुरंत रोकथाम के लिए किसानों को प्रति एकड़ नर्सरी में 0.5% फेरस सल्फेट और 1% यूरिया के घोल का मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. साथ ही, खेत से अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकालें. मात्र दो से तीन दिनों में ही आपकी पौध फिर से पूरी तरह हरी-भरी और स्वस्थ हो जाएगी.

खेतों में गहराता संकट और पीलापन

धान की रोपाई का सीजन शुरू होते ही देश के कई हिस्सों से नर्सरी के पीली पड़ने की शिकायतें आ रही हैं. किसानों ने बताया कि शुरुआती दिनों में अच्छी दिखने वाली पौध अचानक ऊपर से नीचे की ओर पीली होने लगी है. इस वजह से पौधों का विकास पूरी तरह से रुक गया है. अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मुख्य खेतों में रोपाई के लिए स्वस्थ पौधे नहीं मिल पाएंगे, जिससे इस साल धान के कुल उत्पादन पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है.

क्यों आ रही है यह समस्या?

एक्सपर्ट के मुताबिक, लगातार एक ही तरह की खेती करने से मिट्टी में ‘लोहे और नाइट्रोजन’ जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी हो गई है. इसके अलावा, कई किसान नर्सरी में लगातार पानी भरकर रखते हैं. यह जलभराव पौधों की जड़ों के लिए जहर साबित हो रहा है, क्योंकि इससे जड़ों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है. इसलिए भी पीलापन की समस्या आती है.

वैज्ञानिकों का अचूक और त्वरित समाधान

इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिकों ने एक अचूक फॉर्मूला जारी किया है. ऐसे में किसान प्रति एकड़ नर्सरी के हिसाब से 0.5 प्रतिशत फेरस सल्फेट यानी लोहा और 1 प्रतिशत यूरिया का एक मिक्स घोल तैयार करें. इस संतुलित घोल का खड़ी नर्सरी पर समान रूप से छिड़काव करें. यूरिया जहां नाइट्रोजन की कमी को तुरंत पूरा करेगा, वहीं फेरस सल्फेट पत्तियों को उनका प्राकृतिक हरा रंग वापस लौटाने में मदद करेगा.

जलभराव प्रबंधन और सावधानी

उर्वरक छिड़काव के साथ-साथ किसानों को अपने खेतों के प्रबंधन में भी तुरंत बदलाव करना होगा. सबसे पहले नर्सरी बेड में जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने की व्यवस्था करें. खेत में केवल उतनी ही नमी रखें जितनी पौधों की जड़ों के लिए जरूरी हो. एक्सपर्ट का दावा है कि सूखी और हवादार मिट्टी में छिड़काव का असर दोगुना तेजी से होता है. इन सावधानियों को अपनाकर किसान मात्र 48 से 72 घंटों के भीतर अपनी नर्सरी को दोबारा चमकदार और हरा-भरा बना सकते हैं.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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