Image Slider

Last Updated:

Sultanpur History: उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला देश की सियासत में एक बेहद खास मुकाम रखता है, जहां गांधी परिवार से लेकर कई दिग्गज नेताओं की किस्मत का फैसला यहां की जनता ने किया है. ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा साल 1957 के लोकसभा चुनाव का है, जब बनारस से आकर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के बेटे गोविंद मालवीय ने सुल्तानपुर से चुनाव जीता था. हालांकि, एक दुखद मोड़ के कारण वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए, जिसके बाद सुल्तानपुर की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई.

सुल्तानपुर: राजनीतिक नजरिए से उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला हमेशा से काफी चर्चा में रहा है. इस धरती ने देश के कई कद्दावर और बड़े नेताओं की जीत-हार का फैसला किया है. सुल्तानपुर से गांधी परिवार का नाता भी काफी गहरा रहा है, लेकिन आज हम बात कर रहे हैं देश के महान नेता पंडित मदन मोहन मालवीय के परिवार की. बहुत कम लोग जानते हैं कि साल 1957 में मदन मोहन मालवीय के बेटे गोविंद मालवीय ने सुल्तानपुर से लोकसभा चुनाव लड़ा था और यहां की जनता का भरोसा जीतकर संसद पहुंचे थे. हालांकि, उनका कार्यकाल एक दुखद मोड़ पर खत्म हुआ. आइए जानते हैं उनके सांसद बनने की पूरी कहानी.

बनारस से आकर सुल्तानपुर में दर्ज की थी जीत
सुल्तानपुर के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह बताते हैं कि सुल्तानपुर के लिए यह बड़े फख्र की बात थी कि महामना मदन मोहन मालवीय के पुत्र गोविंद मालवीय ने यहां की जनता का प्रतिनिधित्व किया था. साल 1957 के लोकसभा चुनाव में गोविंद मालवीय बनारस से सुल्तानपुर आए और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर शानदार जीत दर्ज की. उस समय वे अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर थे, फिर भी उन्होंने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर काम किया.

असमय मौत के कारण पूरा नहीं हो पाया कार्यकाल
गोविंद मालवीय के सांसद बनने के दो-तीन साल के भीतर ही उनका अचानक निधन हो गया. सुल्तानपुर के इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी सांसद की कार्यकाल के दौरान ही मृत्यु हो गई हो. उनके निधन के बाद साल 1960-61 के दौरान सुल्तानपुर सीट पर लोकसभा का उपचुनाव कराया गया. इस चुनाव में देश के बड़े नेता गोविंद बल्लभ पंत के बेटे केसी पंत मैदान में उतरे, लेकिन सुल्तानपुर की जनता ने उन्हें हरा दिया.

जनता ने बाहरी नेताओं को छोड़ स्थानीय चेहरे को चुना
गोविंद मालवीय के जाने के बाद सुल्तानपुर के लोगों का मूड बदल गया और उन्होंने अगले चुनाव में किसी बाहरी चेहरे के बजाय अपने स्थानीय नेता को चुनने का मन बना लिया. उपचुनाव में केसी पंत की हार के बाद, सुल्तानपुर की जनता ने स्थानीय नेता बाबू गणपत सहाय को अपना नया सांसद चुना. बाबू गणपत सहाय उस समय कांग्रेस से बगावत कर चुके थे, लेकिन उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें वापस पार्टी में शामिल किया. इसके बाद 1962 के आम चुनाव में कांग्रेस ने गणपत सहाय के बेटे को टिकट दिया और एक बार फिर इस सीट पर अपनी जीत दर्ज की.

About the Author

authorimg

Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||