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गाजियाबाद। जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में नक्शा पास कराने के लिए दो प्राधिकरणों में अलग-अलग रेट होने से उद्यमी खासे परेशान हैं। उद्यमियों का कहना है कि जहां यूपीसीडा नक्शा पास करने के लिए करीब 125 रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क ले रहा है। वहीं, विकास प्राधिकरण नगर निगम क्षेत्र में 1000 से 1500 और नगर निगम सीमा के बाहर दो से ढाई हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क जमा करा रहा है। इससे उद्यमियों में काफी रोष है। उद्यमियों ने शासन में शिकायत कर रेट को एक सामन करने की मांग की है।


ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर ऑर्गेनाइजेशन के उपाध्यक्ष एसपी चौहान का कहना है कि मैनापुर, दुहाई के पास पिछले 40 साल से औद्योगिक इकाइयां संचालित हो रही हैं। इन इकाइयों के संचालकों की ओर से यहां साफ-सफाई कराई जाती है। यह क्षेत्र यूपीसीडा के बाहर है। यहां जीडीए की ओर से नोटिस देकर विकास शुल्क के नाम पर दो से ढाई हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से विकास शुल्क मांगा जा रहा है। जबकि यूपीसीडा अपने क्षेत्र में इकाइयों से 125 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से शुल्क ले रहा है।

संगठन के सचिव निर्मल सिंह का कहना है कि एक ही शहर में दो अलग-अलग रेट कैसे हो सकते हैं। प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि उद्यमियों के हित को ध्यान में रखते हुए जीडीए की ओर से तय किए गए शुल्क में कमी होनी चाहिए। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष एके शर्मा का कहना है कि उद्योग जगत इस समय वैश्विक आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में सरकार को उद्योगों को ध्यान में रखकर राहत देनी चाहिए।

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