मगर, सहारनपुर में बीते कई दिनों से मौसम सामान्य बना हुआ है और सुबह से ही चिलचिलाती धूप निकालने के साथ गर्मी अपने सितम पर पहुंच जाती है. जैसे ही सूरज चढ़ता है उमस भी बढ़ती है. हालांकि मौसम सामान्य बना होने के कारण बारिश का कोई असर नहीं लग रहा है. मुरादाबाद में भी सुबह से ही गर्मी के कारण मौसम का हाल बेहाल है. वर्तमान तापमान कि अगर बात की जाए तो 35 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है.
हालांकि, उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में शनिवार सुबह से मौसम का मिजाज बदला-बदला रहा. जिले के कई इलाकों में आसमान पर बादल छाए रहे, जबकि कुछ स्थानों पर तेज धूप निकलती रही. बादलों की आवाजाही के बावजूद उमस और गर्मी से लोगों को राहत नहीं मिली. दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ने से लोग गर्मी से परेशान रहे.
यहां बरस सकते बदरा
आईएमडी ने सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, प्रयागराज, जौनपुर, अयोध्या, अमेठी, रायबरेली, फतेहपुर, बांदा और सिद्धार्थनगर में तेज आंधी-बारिश और तूफान का येलो अलर्ट जारी किया है. बताया जा रहा है कि 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. ऐसे में यहां के लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी. इतनी तेज गति की हवाएं कमजोर संरचनाओं, टिन शेड और पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचाने के लिए पर्याप्त मानी जाती हैं.
यहां चलेगी लू
सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बरेली, कानपुर, खेरी और हरदोई समेत कई इलाकों में भीषण गर्मी का कहर बरपेगा. ऐसे में अगर आप घर से बाहर निकलने की सोच रहे हैं तो छाता और पानी की बोतल साथ में जरूर रखें.
मानसून की चाल सुस्त
दूसरी ओर, मानसून की रफ्तार अब भी धीमी बनी हुई है. केरल में इस सीजन के दौरान अब तक सामान्य से 33 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. सबसे अधिक प्रभावित वायनाड जिला रहा है, जहां 64 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. मौसम विभाग का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होता है तो देश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है, जिससे गर्मी और जल संकट दोनों से राहत मिल सकती है.
किसानों को ये सलाह
कृषि विभाग से 23 जून 2026 तक मिले आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों के निर्धारित लक्ष्य 110.00 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष अब तक केवल 6.63 लाख हेक्टेयर (5.99 प्रतिशत) बुवाई पूरी हो सकी है. इस साल मानसून में सामान्य से कम वर्षा के अनुमान को देखते हुए वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष फसल प्रबंधन की सलाह दी है. वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों को धान के स्थान पर ‘श्री अन्न’ जैसे मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कोदों के साथ-साथ उर्द, मूंग और तिल जैसी फसलों को प्राथमिकता देने को कहा गया है.
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