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बलिया में एक हिंदू परिवार पिछले 10 पीढ़ियों से मोहर्रम पर ताजिया निकालने की परंपरा निभा रहा है. सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बने इस परिवार ने मुकदमे के बाद हाई कोर्ट से भी जीत हासिल की थी. आज भी पूरे सम्मान और आस्था के साथ यह परंपरा जारी है, जो गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे का अनूठा संदेश देती है.

बलिया: धर्म अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत और आस्था की डोर जब दिलों को जोड़ती है, तो गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे खूबसूरत तस्वीर उभर कर सामने आती है. बलिया में मोहर्रम के मौके पर ऐसा ही एक परिवार सालों से सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बना हुआ है. मुस्लिम समाज के गम और श्रद्धा से जुड़े इस पर्व पर जहां ताजिया निकाला जाता है, वहीं उत्तर प्रदेश के जनपद बलिया का एक हिंदू परिवार भी पूरे सम्मान और परंपरा के साथ ताजिया तैयार कर उसे जुलूस में शामिल करता है. पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा न केवल एक रस्म है, बल्कि भाईचारे, आपसी विश्वास और सामाजिक एकता का बहुत बड़ा संदेश भी है. आगे विस्तार से जानिए…

हिंदू परिवार पर ताजिया निकालने के लिए हुआ था केस

वर्तमान निवासी जगदीशपुर शिव कुमार गुप्ता ने कहा कि इनके पूर्वज भी ताजिया निकालते आ रहे हैं. इस परम्परा को करते हुए, इनकी 10 पीढ़ियां गुजर चुकी है. इन मुस्लिम भाइयों से बड़ा प्रेम और सौहार्द रहता हैं. हालांकि, इन हिंदू परिवार पर ताजिया निकालने के लिए मुकदमा भी हुआ था, जिसमें इस परिवार को हाई कोर्ट से जीत मिली हुई है. इस परिवार के पास हाई कोर्ट की डिग्री भी रही है. यही नहीं, इनकी ताजिया सबसे आगे रहेगी, इसका भी मजिस्ट्रेट के द्वारा फैसला दिया जा चुका है.

आज इनकी ताजिया ऐतिहासिक रूप ले चुकी है. ताजिया निकालने की परंपरा इनके पीढ़ियों से चली जा रही है, यह भी चला रहे हैं और इनका विश्वास है कि आगे इनके बच्चे भी ताजियां निकालेंगे. उन्होंने कहा कि, इनके पूर्वजों की मन्नतें पूरी हो गई, तभी ये ताजिया निकालने की शुरुआत किए.

हिंदू-मुस्लिम के लिए मिसाल

राजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि, यह उनके हिसाब से बहुत अच्छा कार्य है. यह गंगा जमुनी तहजीब के रूप में हिंदू मुस्लिम के लिए मिसाल है. हालांकि, किसी को भी जातपात का भेदभाव नहीं रखना चाहिए. आज मुहर्रम का पर्व है और दफन की रात है. आज मुस्लिम भाइयों का मातम का त्यौहार है. पहले दिन ताजिया के लिए मिट्टी कर्बला से लाई जाती है और दूसरे दिन खाली चौक रहती है और तीसरे दिन बड़ी वाली ताजिया रखी जाती है, जो कत्ल की रात होती है. आज चौथा दिन दफन की रात है.

छोटी बच्ची पल्लवी गुप्ता ने कहा कि, आज उनके घर से ताजिया निकल रही है. बहुत अच्छा लगता है. इनके बाबा और दादा आदि सभी लोग मिलकर ताजिया निकालते हैं. सभी को एक साथ मिलजुल करके रहना चाहिए.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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