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<strong>2026 Vat Savitri Purnima: </strong>हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत बेहद खास और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह पावन पर्व विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं। साल 2026 में यह व्रत पूरे देश में पारंपरिक रीति-रिवाजों और आधुनिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। साल 2026 में वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-katha-in-hindi-126051500019_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत पर पढ़ें ये महत्वपूर्ण पौराणिक कथा</a></strong>


 

अमावस्या और पूर्णिमा व्रत में क्या है अंतर?

 


अक्सर महिलाओं में इस व्रत की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन रहता है। दरअसल, वट सावित्री का व्रत दो अलग-अलग तिथियों पर रखा जाता है। उत्तर भारत में सुहागिनें ज्येष्ठ अमावस्या के दिन यह व्रत रखती हैं, जबकि महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे वट सावित्री पूर्णिमा कहते हैं। <br />
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    क्यों इतना खास है वट सावित्री पूर्णिमा का महत्व?</h3>
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    यह सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि अटूट प्रेम और दृढ़ संकल्प का उत्सव है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन सती सावित्री ने अपने पातिव्रत धर्म के बल पर मृत्यु के देवता यमराज को भी झुकने पर मजबूर कर दिया था और अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थीं।

     

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, बरगद (वट) के पेड़ में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। चूंकि यह वृक्ष सैकड़ों वर्षों तक जीवित रहता है, इसलिए सुहागिनें इसकी पूजा कर अपने पति के लिए भी दीर्घायु (लंबी उम्र) का वरदान मांगती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-a-great-fast-for-married-women-learn-10-things-126051500005_1.html" target="_blank">वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए महाव्रत, जानें पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी और जरूरी बातें vat savitri vrat 2026</a></strong>

वट पूर्णिमा 2026: तिथि और पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

<strong>अगर आप भी इस साल यह व्रत रख रही हैं, तो उदयातिथि के अनुसार पूजा के सही समय और तारीख को डायरी में नोट कर लें:</strong>


 


पूर्णिमा तिथि शुरू: 29 जून 2026 को तड़के/ सुबह 03:06 बजे से


 


पूर्णिमा तिथि समाप्त: 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे। 


 


<strong>व्रत की तारीख: </strong>उदयातिथि की मान्यता के अनुसार, व्रत और पूजन सोमवार, 29 जून को ही किया जाएगा।


 

पूजा के लिए सबसे उत्तम समय:

सुबह का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 08:55 AM से सुबह 10:40 AM तक


 


अभिजीत मुहूर्त (महा शुभ): दोपहर 11:57 AM से दोपहर 12:52 PM तक


 

स्टेप-बाय-स्टेप संपूर्ण पूजन विधि

इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं। आइए जानते हैं पूजा का सही तरीका:


 


<strong>स्नान और संकल्प:</strong> सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें। इस दिन लाल, पीले या हरे रंग के पारंपरिक वस्त्र पहनना बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।


 


<strong>पूजा की थाली: </strong>अपनी थाली में रोली, अक्षत/ चावल, धूप, दीपक, भीगे हुए चने, कलावा (कच्चा सूत), फल, मिठाई और जल का पात्र सजाएं। साथ ही माता सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर साथ रखें।


 


<strong>वट वृक्ष की पूजा:</strong> बरगद के पेड़ के पास जाकर सबसे पहले जल अर्पित करें। इसके बाद पेड़ को तिलक लगाएं, अक्षत, फूल और भीगे हुए चने चढ़ाएं।


 


<strong>सूत लपेटना और परिक्रमा: </strong>हाथ में कलावा या कच्चा सूत लेकर बरगद के पेड़ की 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय सूत को पेड़ के तने पर लपेटते जाएं और मन में पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।


 


<strong>कथा और आरती:</strong> पूजा स्थल पर बैठकर सावित्री-सत्यवान की पौराणिक व्रत कथा जरूर सुनें। इसके बाद धूप-दीप से आरती करें और बांस के पंखे से वट वृक्ष व मूर्तियों को हवा करें।


 


<strong>बड़ों का आशीर्वाद: </strong>पूजा संपन्न होने के बाद घर के बुजुर्गों और सास के पैर छूकर आशीर्वाद लें। उन्हें &#039;बायना&#039; में सुहाग सामग्री और मिठाई भेंट करें।


 

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