Ganj Shahida Mosque: यूपी के वाराणसी की एक मस्जिद काफी चर्चाओं में है. सवाल उठ रहा है कि क्या ये मस्जिद टूटेगी या फिर सलामत रहेगी. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या हो गया. दरअसल, इस मस्जिद पर एक के बाद एक नए नोटिस चिपकाए जा रहे हैं और फिर हटा भी लिए जा रहे हैं. ऐसे में समझना मुश्किल हो गया है कि आखिर इस मस्जिद के साथ क्या ही होगा.
खुद को रेलवे का अधिकारी बता रहे शख्स ने बताई सच्चाई.
गंज शाहिदा मस्जिद पर बीती 13 जून को रेलवे ने एक नोटिस लगाया था. इसमें साफ-साफ 20 जून तक मस्जिद हटाने की मोहलत दी गई थी. कहा गया था कि नोटिस में कहा गया था कि 350 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे काशी रेलवे स्टेशन पुनर्विकास कार्य की जद में रेलवे भूमि पर स्थित गंज शहीदा मस्जिद आ रही है. मगर, अचानक से फिर एक नोटिस मस्जिद पर चस्पा हो गया. इस नोटिस पर रेलवे ने अपने ही 13 जून के नोटिस को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की बात कही. हालांकि दोनों ही नोटिस पर रेलवे की मोहर नहीं लगी थी.
विवाद तब गहराया जब एक घंटे बाद खुद को रेलवे कर्मचारी बताने वाला सुनील यहां पहुंचा और निरस्तीकरण से जुड़ा नोटिस हटाते हुए इसे फर्जी बताने लगा. कर्मचारी ने बताया कि दरअसल यह नोटिस भ्रामक था और किसी अज्ञात व्यक्ति ने इसे पहले से लगे रेलवे के नोटिस के ऊपर चस्पा कर दिया था. हालांकि लोग वहां पहुंच गए और विवाद होने लगा. गंज शाहिदा मस्जिद को अंजुमन इंतजामिया ने 900 सौ साल पुरानी बताया है. मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि नया नोटिस लगाया गया था, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया. नोटिस किसने हटाया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है.
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