रास लफान को एनर्जी का सेंटर प्वाइंट क्यों कहते हैं?
कतर के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी दुनिया का सबसे बड़ा LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट सेंटर है. यह शहर लगभग 300 वर्ग किलोमीटर में फैला है. यह औद्योगिक शहर कतर के विशाल नार्थ फील्ड गैस भंडार से निकलने वाली प्राकृतिक गैस को LNG बनाकर दुनिया भर में भेजता है. यहीं से हर साल लगभग 7.7 करोड़ टन एक्सपोर्ट करने की क्षमता विकसित की गई थी, जिससे कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है. यहां 14 LNG ट्रेनें, गैस-टू-लिक्विड प्लांट, LPG, कंडेन्सेट, हीलियम और सल्फर उत्पादन की सुविधाएं भी मौजूद हैं. एशिया ही नहीं, यूरोप के तमाम देश भी गैस यहीं से ले जाते हैं.
भारत कतर से कितनी LNG आयात करता रहा?
भारत ने 2022-23 में लगभग 26.3 मिलियन टन LNG मंगाई, इनमें से करीब 10.5-10.7 मिलियन टन अकेले कतर से आई. 2023-24 में 11 मिलियन टन एलएनजी यहां से खरीदी गई. 2024-25 में 11.2 मिलियन टन यानी करीब 41.4% हिस्सा अकेले कतर का था. 2025 में भी भारत ने करीब 11.3-11.4 मिलियन टन एलएनजी रास लफान से मंगाई, जो कुल आयात का लगभग 45% थी. इस साल भी भारी मात्रा में एलएनजी के कांट्रैक्ट भारत ने किए हैं.
कतर से भारत तक LNG कैसे आती है?
नॉर्थ फील्ड से गैस निकाली जाती है, फिर उसे रास लफान में लाकर प्रोसेस किया जाता है. उसके बाद इसे -162°C तक ठंडा करके लिक्विफाइड नेचुरल गैस में बदला जाता है. आप सोच रहे होंगे कि इतना ठंडा करने की क्या जरूरत, तो बता दें कि ठंडा करने से गैस 600 गुना कम जगह लेती है. मतलब ठंडा न करने पर जितनी जगह में एक किलो गैस आती, ठंडा करने के बाद उतनी जगह में 600 किलो गैस समा जाती है. इससे समंदर में भेजना आसान हो जाता है. बाद में इन्हें विशेष क्रायोजेनिक टैंकों में भरा जाता है और बड़े-बड़े जहाजों में लोड कर भेजा जाता है. ये स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार करते हुए, फिर अरब सागर से निकलकर भारत पहुंचते हैं. वहां से भारत पहुंचने में आमतौर पर 4 से 6 दिन लग जाता है.
कतर से आई एलएनजी भारत में कहां उतारी जाती है?
कतर से आई एलएनजी सबसे ज्यादा गुजरात के दहेज टर्मिनल पर उतरती है. इसके अलावा कोच्चि, हजीरा, धामरा, एन्नोर और मुंद्रा जैसे टर्मिनलों पर भी कार्गो आता है. आप जानकर हैरान होंगे कि उतरने के बाद इस गैस को फिर रीगैसीफिकेशन किया जाता है और वहां से GAIL समेत अन्य कंपनियों की पाइपलाइन के जरिए पूरे देश में भेजा जाता है. एक तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वैसे ही एलएनजी का संकट है, अब यह नई मुसीबत आन पड़ी है.
हमले के बाद उत्पादन कब तक बंद रह सकता है?
जिन 12 LNG ट्रेनों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, उन्हें QatarEnergy एक महीने के भीतर दोबारा चालू करने की तैयारी कर रही है. लेकिन जिन दो LNG ट्रेनों पर मिसाइलों का सीधा असर पड़ा, उनकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं. यदि सुरक्षा जांच और तकनीकी निरीक्षण लंबा चला तो अगले कुछ महीनों तक LNG लोडिंग सामान्य होने में देरी हो सकती है. यही वजह है कि कतर की कुल LNG निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा लंबे समय तक प्रभावित रहने का अनुमान है.
भारत के लिए यह कितनी बड़ी मुसीबत है?
भारत के पास कुछ दिनों का टर्मिनल स्टॉक, घरेलू गैस उत्पादन और दूसरे देशों से स्पॉट कार्गो खरीदने का विकल्प मौजूद हैं. लेकिन यदि कतर से आपूर्ति कई महीनों तक कम रहती है, तो भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या अफ्रीका से महंगी LNG खरीदनी पड़ेगी. सबसे बड़ा असर खाद, CNG-PNG, गैस आधारित बिजली संयंत्र, रिफाइनरियों और सिरेमिक-ग्लास उद्योग पर पड़ सकता है. यदि स्पॉट LNG के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो सरकार को गैस आवंटन की प्राथमिकता तय करनी पड़ सकती है, जिसमें पहले घरेलू PNG, CNG और उर्वरक क्षेत्र को गैस दी जाती है, जबकि उद्योगों को महंगी गैस खरीदनी पड़ सकती है. राहत की बात है कि भारत अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई तथा कुछ अफ्रीकी देशों से भी LNG खरीद रहा है.
भारत में कतर से आने वाली LNG का कहां-कहां इस्तेमाल होता है?
भारत में प्राकृतिक गैस की कुल खपत का लगभग 45-50% हिस्सा उद्योगों, 30% उर्वरक क्षेत्र, 10-12% CNG-PNG, 6-8% बिजली उत्पादन और शेष रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल और अन्य उद्योगों में इस्तेमाल होता है. देश के अधिकांश यूरिया संयंत्र प्राकृतिक गैस पर चलते हैं. इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे, लखनऊ, कानपुर, इंदौर, सूरत, जयपुर, हैदराबाद, बेंगलुरु और कई अन्य शहरों में चलने वाली CNG बसें, टैक्सी और कारें भी इसी गैस पर निर्भर हैं. लाखों घरों में PNG से खाना बनता है. इसके अलावा रिलायंस, इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल की कई रिफाइनरियां तथा पेट्रोकेमिकल उद्योग भी प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल करते हैं. गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में गैस की खपत सबसे अधिक है.
क्या भारत कतर के अलावा दूसरे देशों से LNG मंगा सकता है?
हां, भारत के पास कतर के अलावा कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन वे पूरी तरह आसान या सस्ते नहीं हैं. भारत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, UAE, ओमान, नाइजीरिया, अंगोला, मोजाम्बिक और कुछ अन्य देशों से भी LNG खरीदता है. अमेरिका से आने वाली LNG सबसे तेजी से बढ़ा विकल्प बनकर उभरी है, जबकि ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीकी देशों से भी नियमित कार्गो आते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट से भी तत्काल जरूरत के अनुसार LNG खरीदी जा सकती है. हालांकि यह महंगी होती है.
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