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कंटीले तार-बाड़ नहीं, पौधे करेंगे खेत की चौकीदारी! आवारा जानवर रहेंगे दूर

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Crop Protection from Animals: खेतों को आवारा जानवरों से बचाने के लिए महंगे कटीले तार और बांस लगाने का झंझट अब हमेशा के लिए खत्म हो सकता है. आजमगढ़ के कृषि एक्सपर्ट ने किसानों के लिए बायो फेंसिंग का एक ऐसा अनोखा तरीका बताया है, जिससे खेत तो सुरक्षित रहेगा ही, साथ ही किसानों को डबल कमाई का मौका भी मिलेगा. करौंदा, नींबू और नागफनी जैसे पौधों से होने वाली इस प्राकृतिक फेंसिंग से फसलें कीट-पतंगों से बची रहती हैं और खाद का खर्च भी कम हो जाता है.

आजमगढ़: अपने खेतों और फसलों को सुरक्षित रखने के लिए किसान भाई आजकल महंगे कटीले तार, लोहे की जाली या बांस-बल्ले का इस्तेमाल करते हैं. इसमें लागत बहुत ज्यादा आती है और कुछ साल बाद ये तार खराब भी हो जाते हैं. लेकिन अब आजमगढ़ के किसानों के लिए खेत की घेराबंदी का एक ऐसा कमाल का प्राकृतिक आइडिया सामने आया है जो जेब पर भारी भी नहीं पड़ेगा और कमाई भी कराएगा. इसे ‘बायो फेंसिंग’ यानी ऑर्गेनिक घेराबंदी कहा जाता है. इस तरीके से खेत की सुरक्षा तो पक्की होती ही है, साथ ही किसान भाई मुख्य फसल के साथ फेंसिंग वाले पौधों से भी अच्छी पैदावार और मुनाफा ले सकते हैं.

क्या है बायो फेंसिंग और क्यों है यह सबसे बेस्ट?
प्राकृतिक खेती के एक्सपर्ट राकेश पांडे बताते हैं कि बायो फेंसिंग का मतलब है खेत के चारों तरफ कटीले या घने पौधों की एक मजबूत दीवार तैयार करना. यह तरीका फसलों को आवारा जानवरों से बचाने के साथ-साथ कई तरह के रोगों और कीट-पतंगों से भी सुरक्षित रखता है. जैविक घेराबंदी के लिए हमेशा ऐसे पौधों का चुनाव करना चाहिए जो काफी घने हों, कांटेदार हों और बहुत तेजी से बढ़ते हों. इसमें घास वाली प्रजातियों से लेकर छोटे पेड़ों तक का इस्तेमाल किया जा सकता है. इन्हें लगाने का एक खास नियम होता है. इन पौधों को क्रमवार उत्तर से दक्षिण की दिशा में खेत के किनारों पर लगाया जाता है ताकि पौधों को बराबर धूप मिलती रहे.

इन पौधों से करें घेराबंदी, होगी अतिरिक्त कमाई
किसान भाई बायो फेंसिंग के लिए अपने बजट के हिसाब से पौधों का चुनाव कर सकते हैं. आप अपने खेत के चारों तरफ करौंदा, नींबू, नागफनी, सदाबहार और बांस के पौधे लगा सकते हैं. ये पौधे बहुत कम खर्चे में तैयार हो जाते हैं और इनके कांटे व सघनता के कारण कोई भी जानवर खेत के अंदर नहीं घुस पाता. अगर बजट अच्छा है, तो मार्केट में मिलने वाले खास हाइब्रिड कटीले पौधे भी लगाए जा सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि करौंदा और नींबू जैसे पौधों से कुछ ही समय में फल मिलने लगते हैं, जिन्हें बाजार में बेचकर किसान भाई मुख्य फसल के अलावा अलग से तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं.

कीड़े-मकोड़ों से सुरक्षा और मौसम पर कंट्रोल
इस ऑर्गेनिक फेंसिंग के फायदे सिर्फ जानवरों को रोकने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके कई अन्य चमत्कारी लाभ भी हैं. इन कटीले और घने पौधों पर अक्सर छोटी-छोटी चिड़िया अपना घोंसला बना लेती हैं. ये चिड़ियां मुख्य फसल पर लगने वाले हानिकारक कीट-पतंगों और सूंडियों को खाकर फसल की प्राकृतिक रूप से रक्षा करती हैं, जिससे कीटनाशक का खर्च बच जाता है. इसके अलावा तेज हवा के साथ उड़कर आने वाले धूल-कण और अन्य नुकसानदेह तत्व इन पौधों की वजह से मुख्य फसल तक नहीं पहुंच पाते. यह हरी-भरी फेंसिंग खेत के आसपास के तापमान को बढ़ने नहीं देती और वातावरण में नमी बनाए रखती है. साथ ही, इससे मिट्टी और हवा में नाइट्रोजन की मात्रा भी संतुलित रहती है, जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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