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Telegram Ban, NEET Re Exam 2026: नीट री एग्‍जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्‍थाई बैन के बाद इसको लेकर बहस शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर तरह तरह के विचार सामने आ रहे है. यही नहीं एक आईआईटी के डायरेक्‍टर और सीबीएसई पोर्टल में खमी ढूढने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली जो काफी वायरल हो रही है.

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Telegram बैन को लेकर मचा बवाल, IIT डायरेक्‍टर और छात्र सार्थक आमने सामने Zoom

social media, Telegram Ban, NEET Re Exam 2026: नीट पेपर से पहले टेलीग्राम बैन कर दिया गया है.

Telegram Ban, NEET Re Exam 2026: नीट री-एग्जाम से पहले सरकार ने टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगा दिया है.जिसके बाद एक नई बहस शुरू हो गई है. यह बहस सिर्फ टेलीग्राम के बैन तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब इसके तकनीकी फीचर्स, पेपर लीक के दावों और डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता तक पहुंच गई है.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसको लेकर आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल, साइबर सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्टस और छात्र सार्थक सिद्धांत के बीच तीखी बहस देखने को मिली. इस बहस का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जिसमें सार्थक सिद्धांत ने एक साधारण Meow Meow मैसेज के जरिए आईआईटी निदेशक के दावे को चुनौती देने की कोशिश की.

आखिर टेलीग्राम पर बैन क्यों लगाया गया?

सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से मिली जानकारी के आधार पर टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगाई है. एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी और कथित पेपर लीक गतिविधियों में टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल किया जा रहा था.नीट री-एग्जाम से पहले यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि किसी भी तरह की अफवाह, फर्जी पेपर लीक या गलत जानकारी को फैलने से रोका जा सके हालांकि इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाना वास्तव में समस्या का समाधान है या नहीं?

Telegram Ban, NEET Re Exam 2026, iit kanpur: सोशल मीडिया पर शुरू हो गई बहस.

IIT निदेशक ने क्या कहा?

सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी.उन्होंने कहा कि टेलीग्राम की सबसे बड़ी समस्या केवल पेपर लीक शेयर करना नहीं है. उनके मुताबिक इंटरनेट पर जानकारी फैलाने के कई अन्य तरीके भी मौजूद हैं. असली चिंता टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर को लेकर है.उनका तर्क था कि कुछ लोग परीक्षा समाप्त होने के बाद पुराने मैसेज को एडिट कर सकते हैं और उसमें प्रश्न पत्र जोड़कर यह दावा कर सकते हैं कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर मौजूद था. इससे फर्जी पेपर लीक के सबूत तैयार किए जा सकते हैं और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.

सार्थक सिद्धांत ने दिया जवाब

आईआईटी निदेशक के इस तर्क से छात्र और टेक्नोलॉजी रिसर्चर सार्थक सिद्धांत सहमत नहीं थे.सार्थक वही छात्र हैं जो पहले सीबीएसई ओएसएम विवाद को लेकर भी चर्चा में रह चुके हैं. उन्होंने निदेशक के दावे को टेक्‍निकल रूप से गलत बताया और इसके समर्थन में कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा किए.सार्थक ने पहले एक सामान्य मैसेज पोस्ट किया और बाद में उसे एडिट करके उसमें सिर्फ Meow Meow लिख दिया. इसके बाद उन्होंने दिखाया कि टेलीग्राम में एडिट किए गए हर मैसेज के नीचे साफ तौर पर Edited लिखा दिखाई देता है.उन्होंने यह भी बताया कि टेलीग्राम में मैसेज की एडिट हिस्ट्री भी देखी जा सकती है यानी कोई व्यक्ति अगर पुराने मैसेज में बदलाव करता है तो उसका रिकॉर्ड मौजूद रहता है.

‘Meow Meow’ उदाहरण से क्या समझाना चाहते थे सार्थक?

सार्थक का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति परीक्षा के बाद पुराने मैसेज में बदलाव करके उसमें कथित लीक प्रश्न पत्र जोड़ता है तो उस मैसेज पर Edited का टैग दिखाई देगा.ऐसी स्थिति में कोई भी आसानी से समझ सकता है कि मैसेज में बाद में बदलाव किया गया है. इसलिए उनके मुताबिक केवल मैसेज एडिट फीचर को फर्जी पेपर लीक के लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है.सार्थक ने इसी उदाहरण के जरिए आईआईटी निदेशक के दावे को चुनौती दी और कहा कि टेलीग्राम बिना किसी निशान के मैसेज बदलने की अनुमति नहीं देता.

निसर्ग अधिकारी ने भी उठाए सवाल

इस बहस में प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा शोधार्थी निसर्ग अधिकारी भी शामिल हुए.उन्होंने सरकार के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि पेपर लीक की समस्या को रोकने के बजाय टेलीग्राम को ब्लॉक कर देना आसान रास्ता चुनने जैसा है.निसर्ग अधिकारी का कहना था कि टेक्‍निकल रूप से टेलीग्राम को पूरी तरह ब्लॉक करना भी आसान नहीं है. प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूजर प्रॉक्सी सर्वर और वीपीएन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके उस तक पहुंच बना सकते हैं.उनके मुताबिक केवल प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी.

बैन के बावजूद कई यूजर्स चला रहे हैं टेलीग्राम

सरकार के आदेश के बाद भी सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने दावा किया कि उनका टेलीग्राम सामान्य रूप से काम कर रहा है.कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर कर बताया कि वे बिना किसी परेशानी के ऐप का इस्तेमाल कर पा रहे हैं. कुछ यूजर्स एक-दूसरे को वीपीएन और प्रॉक्सी सेटिंग्स का इस्तेमाल करने की सलाह भी देते नजर आए.एक यूजर ने पोस्ट में लिखा कि कोई भी वीपीएन इस्तेमाल करके आईपी एड्रेस बदल लिया जाए तो टेलीग्राम तक पहुंच बनाई जा सकती है.वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि अगर टेलीग्राम पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है तो फिर वह अभी भी ऐप का इस्तेमाल कैसे कर पा रहा है.

क्‍या बैन कर देने से रुक जाएगा पेपर लीक?

पूरे विवाद ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है. सवाल यह है कि क्या किसी प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर देने से पेपर लीक जैसी समस्याएं रुक सकती हैं या फिर इसके लिए अधिक मजबूत जांच और निगरानी तंत्र की जरूरत है.साथ ही यह बहस डिजिटल सबूतों की विश्वसनीयता तक भी पहुंच गई है. एक पक्ष का कहना है कि एडिट फीचर का दुरुपयोग हो सकता है जबकि दूसरा पक्ष दावा कर रहा है कि टेलीग्राम के सिस्टम में बदलाव का रिकॉर्ड छिपाया नहीं जा सकता.फिलहाल टेलीग्राम बैन, पेपर लीक और मैसेज एडिटिंग फीचर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है.

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Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. न्‍यूज 18 में एजुकेशन, करियर, सक्‍सेस स्‍टोरी की खबरों पर. करीब 15 साल से अधिक मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व …और पढ़ें

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