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आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं-
इंटरनेशनल (INTERNATIONAL)
1. पीएम मोदी फांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर पहुंचे
- 14 जून को पीएम नरेंद्र मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में फ्रांस के नीस पहुंचे।
- पीएम मोदी ने पहले दिन फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
- भारत इनोवेट्स भारत के शिक्षा मंत्रालय का ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी।
- पीएम ने यात्रा के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करी।
- 17 जून को पीएम मोदी G7 समिट में शामिल होंगे और इस समिट में वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी मुलाकात करेंगे।
- पीएम मोदी और ट्रम्प इससे पहले फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे।
G7 (ग्रुप ऑफ सेवन)
- G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है।
- G7 में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं।
- इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद ये G7 बना।
- 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा।
- भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर गेस्ट कंट्री के रूप में बुलाया जाता है।
- पीएम मोदी 13 से 17 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर हैं।
- 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है।
नेशनल (NATIONAL)
2. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नए आर्मी चीफ स्टाफ होंगे
- 13 जून को सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को अगला थल सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) अपॉइंट किया।
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरज 30 जून से पदभार संभालेंगे।
- लेफ्टिनेंट जनरल थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे, जो इसी दिन पद से रिटायर होंगे।
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला के स्टूडेंट रहे हैं।
- दिसंबर 1986 में उन्हें ‘आर्मर्ड कॉर्प्स’ में कमीशन मिला था।
- 2021 में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज यूनाइटेड नेशन मिशन अंगोला (UNAVEM III) में ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में सेवा दी है।
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरज ने 2022 में साउथ वेस्टर्न दिल्ली की कमांड संभाली और XXI कॉर्प्स (सुदर्शन चक्र कॉर्प्स) संभाला।
- 2024 में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज साउथ वेस्टर्न कमांड में आर्मी कमांडर रहे।
- इसके साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल धीरज ने 2024 में रुद्र शक्ति ऑपरेशन को भी लीड किया।
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरज अप्रैल 2026 से थल सेना उपप्रमुख हैं।
- लेफ्टिनेंट जनरल धीरज रेगिस्तानी इलाके में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी इलाके में और जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी- रोधी दस्ते को भी लीड कर चुके हैं।
3. इंडियन आर्मी ऑफिसर्स अब बंदी जैकेट पहन सकेंगे
- 14 जून को भारतीय सेना ने अपनी नई ड्रेस रेगुलेशन बुकलेट (Army Uniforms-2026) जारी की।
- नए ड्रेस रेगुलेशन के मुताबिक, पहली बार फॉर्मल ड्रेस में बंदी जैकेट यानी, बंद गले के कोट को भी शामिल किया गया है।
- नए नियम के मुताबिक अब आर्मी ऑफिसर्स ड्यूटी पर रहते हुए बंदी जैकेट पहन सकेंगे।
- जैकेट को फुल-स्लीव शर्ट के ऊपर पहना जाएगा और ये सिंपल और सोबर किसी भड़कीले रंग की नहीं होगी।
- बंदी जैकेट के साथ मैच करते हुए ट्राउजर और बंद जूते पहनना अनिवार्य होगा।
- जैकेट में नेक-हुक (Neck Hook) हो या न हो, दोनों प्रकार की डिजाइन मान्य होंगी।
- इसके साथ ही ड्रेस नंबर 5 और नंबर 6 से सेरेमोनियल पाउच बेल्ट को हटाया गया है।
- वहीं परेड के दौरान रिव्यूइंग अधिकारियों के लिए तलवार साथ रखना वैकल्पिक कर दिया गया है।
- नियमों के तहत महिला अधिकारी सादे रंगों की साड़ियां या दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और टखने तक की लंबाई वाली सीधी पैंट पहन सकती हैं।
- इस नियम में बिना आस्तीन वाले कुर्ते और पलाजो या पैंट जैसे कैज़ुअल लोअर पहनने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है।
- हाल ही में जारी 174 पेज के मैनुअल ‘आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026’ में इन संशोधनों का जानकारी दी है।
- ये बदलाव सेना की वर्दी में मौजूद औपनिवेशिक (Colonial-era) परंपराओं को कम करने के लिए किया गया है।
- मैनुअल में लिखा गया है कि इन परिवर्तनों का उद्देश्य सेना की गरिमा, कार्यक्षमता और परंपराओं को बनाए रखते हुए औपनिवेशिक निशानियों को धीरे-धीरे खत्म करना है।
- एडजुटेंट जनरल ब्रांच (Adjutant General’s Branch) ड्रेस रेगुलेशन बुकलेट को जारी करती है।
- सेना के यूनिफॉर्म से जुड़े सभी दिशानिर्देश, डिजाइन और ग्रूमिंग मानक इसी विंग के तहत नियमित रूप से अपडेट और प्रकाशित किए जाते हैं।
4. DRDO ने 3 सफल फ्लाइट मिसाइल टेस्टिंग की
- DRDO ने 10 और 11 जून को लगातार 3 फ्लाइट टेस्ट किए, जिनमें मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का प्रदर्शन किया गया।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून को इसकी जानकारी सोशल मीडिया X अकाउंट पर शेयर की।
- इस टेस्टिंग में भारत की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों को रोकने की क्षमता को भी टेस्ट किया गया।
- इस टेस्टिंग में DRDO ने AD-1 और AD-2 इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल परीक्षण किया।
- ये मिसाइलें 2,000 से 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानने, ट्रैक करने और हवा में ही नष्ट करने में सक्षम हैं।
- रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन टेस्टिंग ने भारत उन देशों की श्रेणी में आ गया है, जिनके पास ICBM-स्तरीय खतरों को रोकने वाली BMD क्षमता है।
- बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक बेहतर रक्षा नेटवर्क है, जिसमें शक्तिशाली रडार, कमांड सेंटर और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल होती हैं।
- BMD का उद्देश्य दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाना, उनका पीछा करना और लक्ष्य तक पहुंचने से पहले उन्हें नष्ट करना होता है।
- ये सिस्टम वायुमंडल के भीतर (एंडो-एटमॉस्फेरिक) और अंतरिक्ष क्षेत्र (एक्सो-एटमॉस्फेरिक) दोनों स्तरों पर मिसाइलों को भेद सकती है।
- ये टेस्टिंग भारत की मल्टी-लेयर्ड मिसाइल शील्ड को मजबूत बनाएगी।
- अमेरिका, रूस, चीन और कुछ अन्य देशों की तरह भारत भी अब उन्नत BMD क्षमता वाले देशों के समूह में शामिल हो गया है।
- भारत इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरे को खत्म करने वाले देशों में शामिल हो गया है।
- बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) क्लास तक के खतरों समेत बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने और बेअसर करने की क्षमता भी शामिल है।
- यह स्वदेशी तकनीक दुश्मन की मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले हवा में ही नष्ट कर देती है।
- भारत अब उन खास देशों के ग्रुप में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल-लेवल की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता है।
- भारत से पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी। भारत बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम वाला 5वां देश बन गया है।
- आसान भाषा में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को बहुत लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल कहा जा सकता है।
- ये ऐसी मिसाइल होती है जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक पहुंच सकती है।
- आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है। इसके अलावा यह परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती है।
- यह मिसाइल रॉकेट की तरह ऊपर अंतरिक्ष की ओर जाती है, फिर बहुत ऊंचाई से पृथ्वी की ओर लौटती है और बहुत तेज स्पीड से टारगेट पर हमला करती है।
- इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है।
- इसके साथ ही नेवल एंटी-शिप मिसाइल मीडियम रेंज (NASM-MR) की भी सफल टेस्टिंग की गई।
- इसे भारत की समुद्री स्ट्राइक और डिफेंस स्किल को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
AD-1 और AD-2
- AD-1 लंबी दूरी का टू स्टेप इंटरसेप्टर है, जो मध्यम और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक सकता है।
- AD-2 Phase-II BMD सिस्टम का एडवांस इंटरसेप्टर है, जिसे हाई स्पीड और ICBM कैटेगरी के खतरों को खत्म करने के लिए विकसित किया गया है।
भारत से पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास थी।
मिसलीनियस (MISCELLENEOUS)
5. केंद्र सरकार ने 100% शुद्ध इथेनॉल को मंजूरी दी
- 13 जून को केंद्र सरकार ने देश में 100% शुद्ध इथेनॉल को बतौर ईंधन इस्तेमाल करने की मंजूरी दे दी है।
- केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।
- शुद्ध इथेनॉल का उपयोग बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य देश की कच्चे तेल (फॉसिल फ्यूल) के इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करना है।
- इथेनॉल के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा और ये किफायती और टिकाऊ ऑप्शन है।
- भारत अभी अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करके पूरा करता है।
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने इस बदलाव को मंजूरी दी है।
- कई बड़ी कंपनियां 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहन बाजार में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
- केंद्रीय मंत्री के मुताबिक टोयोटा , सुजुकी, MG और हुंडई सहित कुछ कंपनियां अगले 6 हफ्तों के भीतर इथेनॉल से चलने वाले वाहन लॉन्च करेंगे।
एथेनॉल
- एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जो स्टार्च और शुगर के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है।
- इसे पेट्रोल में मिलाकर गाड़ियों में इको-फ्रैंडली फ्यूल की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
आज का इतिहास
- 1908 में कलकत्ता शेयर बाजार की शुरुआत हुई।
- 1947 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने नई दिल्ली में अपने अधिवेशन में भारत के विभाजन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसे माउंटबेटन योजना भी कहा जाता है।
- 2006 में भारत और चीन ने पुराना सिल्क रूट खोलने का फैसला किया।
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