शानदार एक्टिंग के लिए मशहूर इस एक्ट्रेस ने कभी बॉलीवुड पर राज किया था. आमिर खान, अमिताभ बच्चन और अजय देवगन जैसे सुपरस्टार्स के साथ सुपरहिट फिल्में देने के बाद हर कोई उनकी सादगी का दीवाना हो गया था. हालांकि, करियर के अगले पड़ाव पर लगातार मिली फ्लॉप फिल्मों के बाद उन्होंने सिनेमा की चकाचौंध से दूरी बना ली. अब यह एक्ट्रेस आध्यात्मिक राह पर चलकर जीवन का असली सुकून पा रही है.
नई दिल्ली. ग्रेसी सिंह कभी बॉलीवुड की सबसे पॉपुलर हीरोइनों में शुमार थीं. आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘लगान’ में गौरी का किरदार निभाने के बाद वह घर-घर में पहचानी जाने लगीं. इस सफलता के बाद उन्हें इंडस्ट्री में पैर जमाने का मौका मिला और उन्होंने अजय देवगन, संजय दत्त और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों के साथ काम किया.
आमिर खान और ग्रेसी सिंह की फिल्म ‘लगान’ साल 2001 में ऑस्कर के लिए नामांकित हुई थी. इस फिल्म ने वैश्विक स्तर पर धूम मचाई और ग्रेसी रातोंरात स्टार बन गईं. हालांकि, इतनी बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी का स्वाद चखने के बावजूद, वह धीरे-धीरे चमक-दमक वाली इस फिल्म इंडस्ट्री से दूर होती चली गईं.
ग्रेसी सिंह ने अपने करियर की शुरुआत बतौर डांसर की थी, जहां वह ‘द प्लैनेट्स’ नाम के एक डांस ग्रुप के साथ टूर करती थीं. इसके बाद उन्होंने एक्टिंग का रुख किया और साल 1997 में मशहूर टीवी सीरियल ‘अमानत’ से अपना डेब्यू किया. हालांकि, उन्हें असली पहचान साल 2001 में आई आशुतोष गोवारिकर की कालजयी फिल्म ‘लगान’ से मिली.
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पीरियड स्पोर्ट्स ड्रामा ‘लगान’ का लेखन और निर्देशन आशुतोष गोवारिकर ने किया था, जबकि इसके निर्माता आमिर खान थे. फिल्म में ग्रेसी ने अपनी सादगी और मासूमियत से दर्शकों का दिल जीत लिया था. यह फिल्म सुपरहिट रही और ‘मदर इंडिया’-‘सलामी बॉम्बे’ के बाद ऑस्कर की बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में जगह बनाने वाली तीसरी भारतीय फिल्म बनी.
‘लगान’ की ऐतिहासिक सफलता के बाद ग्रेसी सिंह ने ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘गंगाजल’ जैसी एक के बाद एक सुपरहिट फिल्में दीं. इन फिल्मों में उनके बेहतरीन अभिनय और सादगी भरे किरदारों को दर्शकों ने खूब सराहा. हालांकि, लगातार सफल फिल्में देने के बाद भी वह इंडस्ट्री में इस बड़ी सफलता को लंबे समय तक बरकरार नहीं रख पाईं.
आगे चलकर ग्रेसी ने फिल्म ‘अरमान’ में अनिल कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गई. इसके बाद उन्होंने ‘चंचल’, ‘देशद्रोही’ और ‘देख भाई देख’ जैसी फिल्मों में लीड भूमिकाएं निभाईं, लेकिन ये सभी फिल्में दर्शकों को रिझाने में पूरी तरह नाकाम रहीं और बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुईं.
बॉलीवुड में एक के बाद एक लगातार कई फ्लॉप फिल्में देने के बाद ग्रेसी सिंह ने रीजनल सिनेमा का रुख किया. उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम, गुजराती, पंजाबी और बंगाली भाषाओं की फिल्मों में काम तलाशने की कोशिश की. हालांकि, जब इन फिल्मों से भी उनके करियर को कोई खास मदद नहीं मिली, तो उन्होंने बड़े पर्दे से दूरी बनाने का फैसला कर लिया.
ग्रेसी ने हमेशा खुलकर यह माना कि एक्टिंग कभी भी उनकी जिंदगी का आखिरी लक्ष्य नहीं थी. वह कभी बॉलीवुड की बड़ी स्टार बनने की अंधी दौड़ में शामिल नहीं होना चाहती थीं. साल 2015 में उन्होंने टीवी सीरियल ‘संतोषी मां’ से छोटे पर्दे पर शानदार वापसी की. मां संतोषी के किरदार में उन्होंने नई पीढ़ी के दर्शकों का दिल जीत लिया.
फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से दूर होने के बाद पिछले कुछ सालों में ग्रेसी सिंह आध्यात्मिक संस्था ब्रह्माकुमारी से गहराई से जुड़ गईं. वह अक्सर कई मंचों पर इस बारे में खुलकर बात करती हैं. उनका मानना है कि अभिनय, नाम और शोहरत की दुनिया से बहुत आगे निकलकर अब उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर अपनी जिंदगी का असली सुकून और आत्मसंतुष्टि पा ली है.
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