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बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं जैसे इसका नाम सोमवती अमावस्या है वैसे ही यह सोमवार को ही मानी जाएगी. अमावस्या तिथि रविवार दोपहर बाद शुरू हो जाएगी लेकिन उदय तिथि सोमवार को होने के कारण सोमवती अमावस्या का महत्व सोमवार को ही रहेगा. रविवार को इसे नहीं माना जाएगा. सोमवार को कई घंटे तक अमावस्या तिथि रहने के कारण पूरे दिन इसका पुण्यकाल माना जाएगा.

फरीदाबाद: सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी मानी जाती है. सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है. इस बार अधिक मास में साल की पहली सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है. अमावस्या तिथि दो दिन रहने की वजह से लोगों के बीच इसकी सही तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है. ऐसे में श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि सोमवती अमावस्या कब मनाई जाएगी और इस दिन कौन-कौन से उपाय करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी.

लोकल से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं जैसे इसका नाम सोमवती अमावस्या है वैसे ही यह सोमवार को ही मानी जाएगी. अमावस्या तिथि रविवार दोपहर बाद शुरू हो जाएगी लेकिन उदय तिथि सोमवार को होने के कारण सोमवती अमावस्या का महत्व सोमवार को ही रहेगा. रविवार को इसे नहीं माना जाएगा. सोमवार को कई घंटे तक अमावस्या तिथि रहने के कारण पूरे दिन इसका पुण्यकाल माना जाएगा.

पितरों का करें स्मरण

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं इस दिन सबसे पहले पितरों का स्मरण करना चाहिए. पितरों की शांति और कृपा के लिए सफेद वस्तुओं का दान करना शुभ माना गया है. साथ ही लक्ष्मी प्राप्ति के लिए घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाने चाहिए. ऐसा करने से माता लक्ष्मी का घर में आगमन होता है और उनकी कृपा बनी रहती है. मान्यता है कि इससे घर में आर्थिक सुख-समृद्धि बढ़ती है.

घर की दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. इसके अलावा पीपल के पेड़ के पास भी सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है. वहीं तुलसी माता के पौधे के पास घी का दीपक जलाने से भी विशेष फल मिलता है. चार स्थानों पर दीपक जलाने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.

आर्थिक परेशानियां होती हैं दूर

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं सोमवती अमावस्या के दिन पितरों के लिए तर्पण भी करना चाहिए. इसके लिए दाहिने हाथ में तिल और जल लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलांजलि दी जाती है. पिताजी, दादाजी, परदादाजी तथा माताजी, नानाजी और परनानाजी का नाम और गोत्र लेकर तर्पण करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यदि पूरे मंत्र याद न हों तो समस्त पितृ का स्मरण करके भी तर्पण किया जा सकता है.

अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई नहीं देता. चंद्रमा को मन का देवता माना जाता है इसलिए इस दिन भगवान शिव को चावल, चीनी और अन्य सफेद वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए. सफेद वस्तुओं का दान करने से मन शांत रहता है और जीवन में सकारात्मकता आती है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए दान-पुण्य और उपायों से घर में सुख-समृद्धि आती है आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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