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नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति के गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने भारत और अमेरिका के बीच पिछले दो दशकों के मजबूत रणनीतिक रिश्तों में जबरदस्त उबाल ला दिया है. खाड़ी के ओमान तट के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर किए गए घातक हमलों में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत के बाद भारत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. नई दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी दूतावास के उप-प्रमुख (Chargé d’Affaires) जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय (MEA) तलब कर सीधे शब्दों में आंख दिखाई है. तीन दिनों के भीतर यह दूसरी बार है जब भारत ने अमेरिका की इस बेलगाम सैन्य कार्रवाई पर अपनी गहरी नाराजगी और सख्त विरोध दर्ज कराया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आगामी जी-7 शिखर सम्मेलन में होने वाली संभावित मुलाकात से ठीक पहले आए इस कूटनीतिक भूचाल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.

अमेरिकी राजदूत तलब से जुड़ी 5 मुख्य बातें

• अमेरिकी राजनयिक को किया समन: भारत के विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी उप-प्रमुख (Chargé d’Affaires) जेसन मीक्स को तलब कर ओमान तट के पास कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ अत्यंत कड़ा विरोध दर्ज कराया है.

• 3 भारतीय नाविकों की मौत: पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘सेतबेलो’पर अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई, जिसे भारत ने पूरी तरह टालने योग्य और दुखद क्षति बताया है.

• 24 घंटे में दूसरा हमला: इस खूनी घटना के ठीक अगले ही दिन एक अन्य वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें चालक दल के 20 भारतीय सदस्य सवार थे. हालांकि, इस दूसरे हमले में कोई हताहत नहीं हुआ.

• बेहद दुर्लभ कूटनीतिक कदम: भारत और अमेरिका के बीच मजबूत रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी के इतिहास में यह बेहद दुर्लभ मौका है जब नई दिल्ली ने किसी अमेरिकी राजनयिक को इस तरह समन जारी कर फटकार लगाई हो.

• ट्रंप कार्यकाल में बढ़ते कूटनीतिक तनाव: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिकी टैरिफ (सीमा शुल्क) और चीन-पाकिस्तान के साथ वाशिंगटन की बढ़ती नजदीकियों के कारण दोनों देशों के संबंधों पर पहले से ही दबाव है, जो इस घटना के बाद और बढ़ गया है.

आखिर भारत-अमेरिका के रिश्तों में क्यों आया यह उबाल?
भारत द्वारा अमेरिकी राजनयिक को समन करना यह साफ संकेत देता है कि जब बात अपने नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की स्थिरता की आएगी तो नई दिल्ली अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी ताक पर रखने से पीछे नहीं हटेगा. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि असैन्य जहाजों पर इस तरह घातक और जानलेवा बल का प्रयोग पूरी तरह से अस्वीकार्य है. यह कार्रवाई उस संवेदनशील क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री वाणिज्य की सुरक्षा और स्थिरता को सीधे तौर पर खतरे में डालती है.

सवाल-जवाब

भारत ने किस अमेरिकी अधिकारी को विदेश मंत्रालय में समन किया और क्यों?

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में तैनात अमेरिकी उप-प्रमुख (Chargé d’Affaires) जेसन मीक्स को समन किया. यह कदम ओमान के तट के पास अमेरिकी नौसेना द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर किए जा रहे लगातार हमलों के खिलाफ भारत का कड़ा और आधिकारिक विरोध दर्ज कराने के लिए उठाया गया है.

अमेरिकी नौसेना के हमले में भारत को किस तरह का नुकसान उठाना पड़ा है?

अमेरिकी नौसेना द्वारा पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर ‘सेतबेलो’ (Settebello) पर किए गए हमले में चालक दल में शामिल तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई. इसके अलावा, अगले ही दिन एक और ऐसे जहाज पर हमला किया गया जिसमें चालक दल के 20 सदस्य भारतीय थे, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ.

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भारत का अमेरिका को समन करना कितना बड़ा कदम है?

पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच बेहद करीबी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी विकसित हुई है. ऐसे मजबूत संबंधों के बीच भारत द्वारा किसी अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध पत्र सौंपना एक बेहद दुर्लभ और बड़ा कूटनीतिक कदम है, जो भारत के सख्त रुख को दर्शाता है.

इस घटना का असर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आगामी मुलाकात पर क्या पड़ सकता है?

यह दुखद घटना फ्रांस में होने वाले आगामी जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुई है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात होने की संभावना है. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है, जिससे इस बैठक के काफी गरमागरम रहने के आसार हैं.

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