आग लगने के कारणों को और स्पष्ट करने के लिए, दिल्ली पुलिस आईआईटी दिल्ली की मदद लेने की तैयारी कर रही है। संस्थान से आग के फैलने की गति, संरचनात्मक अध्ययन और 3डी मैपिंग जैसे विश्लेषण की उम्मीद है, ताकि घटनाओं के क्रम को समझा जा सके और उन कारकों की पहचान की जा सके जिन्होंने लोगों को अंदर फंसा दिया।
कर्मचारियों की भूमिका और देरी का खामियाजा
जांच में यह भी सामने आया है कि आग लगने के समय होटल में तीन कर्मचारी मौजूद थे: रसोइया केशव नेगी, एक हेल्पर जो ऊपरी मंजिल पर सो रहा था, और मैनेजर रुपेश उर्फ राकेश। पूछताछ के दौरान, केशव नेगी ने कथित तौर पर बताया कि उसने फ्रायर चालू छोड़ दिया था और आग लगने के बाद उसने उसे बुझाने की कोशिश की, लेकिन जब आग उसके नियंत्रण से बाहर हो गई तो वह भाग गया।
आरोप है कि उसने आग की चेतावनी देने, पड़ोसियों को सूचित करने या आपातकालीन सेवाओं को कॉल करने में देरी की। यह भी पता चला है कि आग लगने के पहले संकेतों और पुलिस को पहली कॉल के बीच लगभग आधे घंटे का अंतर था।
जांचकर्ता इस देरी को एक महत्वपूर्ण कड़ी मान रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि समय पर कार्रवाई से इस त्रासदी की भयावहता को कम किया जा सकता था। हेल्पर छत से कूदकर बच निकला, जबकि मैनेजर रुपेश कथित तौर पर रिसेप्शन क्षेत्र से भाग गया। पुलिस अभी भी उसकी तलाश कर रही है।
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