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हरियाणा के अंबाला के थंबर गांव में पूर्व डीएसपी अजय राणा ने 47 एकड़ में ऑर्गेनिक फल बाग लगाया और सालभर उत्पादन से अच्छी आय हो रही है. वह बताते हैं कि सरकार से बागवानी पर सब्सिडी भी मिल रही है. उन्होंने रिटायरमेंट के बाद आराम करना मुनासिब नहीं समझा और बागवानी में लग गए.

अंबाला. खेती में बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के बीच बागवानी किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभर रही है. अंबाला जिले की बराड़ा तहसील के गांव थंबर के रहने वाले पूर्व  डीएसपी अजय राणा ने इसकी मिसाल पेश की है. जहां अधिकांश किसान गेहूं और धान की परंपरागत खेती तक सीमित हैं, वहीं अजय राणा ने 47 एकड़ जमीन पर ऑर्गेनिक फलों का ऐसा बाग तैयार किया है, जो आज उनकी पहचान के साथ-साथ स्थायी आय का मजबूत स्रोत भी बन चुका है.

दिलचस्प बात यह है कि उनके बाग में केवल हरियाणा में उगने वाले फल ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाली कई प्रजातियां भी सफलतापूर्वक तैयार की जा रही है. गौर रहे कि सेब, अखरोट, आड़ू, आलूबुखारा, लीची, चकोतरा, नींबू और आम जैसे फलों से लहलहाता यह बाग अब दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है.

लोकल 18 से बातचीत में अजय राणा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही पेड़-पौधों से विशेष लगाव था.ऐसे में पुलिस विभाग में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने अपने इस शौक को खेती से जोड़ने का फैसला किया,ओर धीरे-धीरे उन्होंने अपनी जमीन पर फलदार पौधे लगाने शुरू किए और आज यह बाग 47 एकड़ में फैल चुका है. खास बात यह है कि पूरा बाग ऑर्गेनिक तरीके से तैयार किया गया है, जहां रासायनिक खादों के बजाय देसी खाद और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है. उन्होंने कहा कि बाग में आम की कई प्रसिद्ध किस्में भी लगाई गई हैं और इनमें बॉम्बे ग्रीन, बिशहरी, लंगड़ा, चौसा और आम्रपाली प्रमुख हैं. उन्होंने बताया कि गर्मियों में इन आमों की मांग हरियाणा के अलावा दिल्ली, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और आसपास के कई शहरों में रहती है. सर्दियों के मौसम में सेब, आड़ू और अन्य फलों की अच्छी बिक्री होती है.यही वजह है कि पूरे वर्ष बाग से किसी न किसी फल का उत्पादन होता रहता है और आय का सिलसिला बना रहता है.

अजय राणा का कहना है कि पारंपरिक खेती में किसानों को मौसम और बाजार दोनों की मार झेलनी पड़ती है, जबकि बागवानी लंबी अवधि का निवेश है क्योंकि एक बार फलों के पेड़ तैयार हो जाएं तो कई वर्षों तक उनसे लगातार उत्पादन मिलता रहता है. उन्होंने बताया कि बाग लगाने के शुरुआती वर्षों में जो खर्च हुआ था, वह करीब बाग लगने के दो साल बाद में ही फल बेचकर निकल गया. इसके बाद से उन्हें लगातार लाभ मिल रहा है और आज बाग से रोजाना हजारों रुपये की आमदनी हो रही है.

किसानों को भी बागवानी अपनाने की सलाह देते हुए अजय राणा का कहना है कि जिन किसानों के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध है, वे फलदार बाग लगाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं. क्योंकि सरकार भी बागवानी को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी उपलब्ध कराती है.इसके अलावा पौधों की देखभाल और रखरखाव के लिए भी सहायता दी जाती है. उन्होंने बताया कि फल उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए उन्हें कई फल मेलों में सम्मानित किया जा चुका है.उनका मानना है कि बागवानी केवल वर्तमान की आय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मजबूत विरासत है. उन्होंने कहा कि एक पुरानी कहावत है कि बाग दादा लगता है और उसके फल आने वाले पोते तक खाते है.

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Vinod Kumar Katwal

Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें

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