अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में लग रहे सवालों के निशानों के बीच, सूर्यकुमार यादव के पास IPL 2026 अपनी बादशाहत को दोबारा साबित करने का सबसे बड़ा अखाड़ा था. मुंबई इंडियंस के इस शहंशाह से करोड़ों फ़ैंस को उम्मीद थी कि अपनी घरेलू पिच पर उतरते ही उनका पुराना ‘360 डिग्री’ अवतार ज़िंदा हो उठेगा लेकिन यह सीज़न सूर्या के करियर का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बन गया. पूरे टूर्नामेंट में सूर्या रन-रन के लिए तड़पते दिखे. न वो पुरानी टाइमिंग थी, न स्पिनर्स के ख़िलाफ़ वो जादुई कलाई का इस्तेमाल.
रिटायरमेंट की राह पर सूर्या?
सूर्यकुमार यादव को हमेशा विश्वास रहा कि उनके अंदर अभी भी खेल बाकी है और सच कहें तो आज भी है. वह उपलब्ध थे, लेकिन लगातार रन नहीं आने की वजह से चयनकर्ताओं को आगे देखना पड़ा. क्रिकेट में यह बिल्कुल जायज़ प्रक्रिया है. चयनकर्ताओं ने उन्हें लंबा मौका दिया, और सूर्यकुमार खेलना जारी रखना चाहते थे लेकिन आखिरकार फैसला चयनकर्ताओं का होता है और उन्होंने वही किया ऐसे में उनसे रिटायरमेंट की उम्मीद करना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि पूरी तरह अव्यावहारिक भी. सूर्यकुमार को कभी नहीं लगा कि उनका खेल खत्म हो चुका है.
सूर्यकुमार यादव एक दिलचस्प केस स्टडी
जिन लोगों ने कुछ महीने पहले ही उन्हें अपने चरम पर देखा है, उनके लिए यह मानना मुश्किल है कि वही बल्लेबाज रन नहीं बना पा रहा लेकिन यही खेल है यही उसकी सच्चाई है. यह रील नहीं, रियल है, और कई बार बेहद क्रूर भी. सूर्यकुमार यादव एक दिलचस्प केस स्टडी रहेंगे. जिन्होंने उनके करियर को करीब से देखा है, वे जानते हैं कि उन्हें मौका देर से मिला. कई घरेलू सीज़न तक उन्होंने लगातार रन बनाए, लेकिन टीम इंडिया का दरवाजा नहीं खुला. जब मौका मिला, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर एंट्री की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.
कोई नहीं है टक्कर में
टी20 क्रिकेट में उन्होंने खुद को निखारा और दुनिया भर में भारत के लिए मैच जिताऊ पारियां खेलीं. कप्तानी भी उन्हें आसानी से नहीं मिली कई लोगों का मानना था कि रोहित शर्मा के बाद हार्दिक पांड्या को कप्तान बनना चाहिए था, लेकिन चोटों के चलते चयनकर्ताओं ने सूर्यकुमार पर भरोसा जताया. कप्तान के तौर पर सूर्यकुमार ने लगभग सब कुछ जीता द्विपक्षीय सीरीज, एशिया कप और वर्ल्ड कप. उन्होंने करीब 85 प्रतिशत मैचों में टीम को जीत दिलाई। फिर भी उन्हें कप्तानी और टीम दोनों से बाहर होना पड़ा. यही क्रिकेट है यह टीम गेम होते हुए भी सबसे ज्यादा व्यक्तिगत प्रदर्शन पर निर्भर करता है. रन या विकेट ही आपकी जगह तय करते हैं.
क्या कप्तानी का दबाव उन पर हावी हो गया? क्या वह दोनों जिम्मेदारियां संभाल नहीं पाए? या फिर कप्तानी की वेदी पर बल्लेबाज सूर्यकुमार की कुर्बानी हो गई? इन सवालों के जवाब शायद कभी नहीं मिलेंगे लेकिन इतना जरूर है कि यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है जिसने अपने मौके का इंतजार किया, फिर उसे मजबूती से पकड़ा और भारत को घर में वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान बना.
प्रेस कॉन्फ्रेंस बनी पतन की वजह
कामयाबी जब लगातार क़दम चूमती है, तो इंसान का आत्मविश्वास कभी-कभी दूसरों को अहंकार लगने लगता है। ऐसा ही एक वाक़या तब हुआ जब टीम कॉम्बिनेशन और इन-फ़ॉर्म खिलाड़ियों (जैसे संजू सैमसन या तिलक वर्मा) को बाहर बैठाने पर एक पत्रकार ने सवाल दाख़ दिया. सूर्या ने उस गंभीर सवाल को अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ मज़ाक में उड़ाते हुए पलटकर पूछ लिया कि तो किसकी जगह खिलाऊँ? उसे ड्रॉप कर दूँ या इसे?लहजे में छिपी वो बेफ़िक्री और हँसी सोशल मीडिया को रास नहीं आई. लोगों ने इसे कप्तानी का घमंड कहा मगर क्रिकेट का देवता बड़ा निर्मम है, जब सूर्या ख़ुद रनों के लिए तरसने लगे, तो फ़ैंस ने उसी वीडियो को ढाल बनाकर उन्हें बेरहमी से ट्रोल करना शुरू कर दिया. जो हँसी उस दिन सूर्या के चेहरे पर थी, वो अब ग़ायब हो चुकी थी.
आज जब सुर्खियां श्रेयस अय्यर की ओर मुड़ गई हैं और सूर्यकुमार पीछे छूटते नजर आते हैं, तब भी उनके योगदान को कोई नहीं छीन सकता. वह हमेशा उस कप्तान के रूप में याद किए जाएंगे जिसने भारत को घरेलू टी20 वर्ल्ड कप जिताया और एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ लगातार जीत दिलाई. अब जब वह खुद को फिर से संवारने की कोशिश कर रहे हैं, इतना कहना गलत नहीं होगा यह एक शानदार पारी रही है.
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