CBSE 12th Re Evaluation Marks Rule: सीबीएसई 12वीं रिजल्ट के बाद मार्क्स टोटलिंग की शिकायतों पर बोर्ड ने स्थिति साफ की है. जानिए क्या है एक्स्ट्रा या ओवर अटेम्प्ट किए गए सवालों पर नंबर जोड़ने का नया नियम और री-इवैल्यूएशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस और फीस स्ट्रक्चर.
CBSE 12th Re Evaluation: सीबीएसई बोर्ड ने री-इवैल्युएशन के नियमों की जानकारी दी है
क्या है ‘ओवर अटेम्प्ट’ का नियम? कैसे मिलता है फायदा?
सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी स्टूडेंट ने प्रश्नपत्र में दिए गए अनिवार्य प्रश्नों से अधिक प्रश्नों या उनके सब-पार्ट्स के उत्तर दिए हैं तो बोर्ड हमेशा छात्र के फायदे की बात सोचता है. पॉलिसी के मुताबिक, सिस्टम छात्र की तरफ से हल किए गए सभी अतिरिक्त प्रश्न भी चेक करता है, लेकिन फाइनल टोटल में केवल उन्हीं प्रश्नों के अंक जोड़े जाते हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मार्क्स मिले हों. जिन एक्सट्रा प्रश्नों में कम अंक होते हैं, उन्हें सिस्टम ‘ओवर अटेम्प्ट’ मानकर कुल योग से बाहर कर देता है. यही वजह है कि छात्र जब सारे प्रश्नों के नंबर खुद जोड़ते हैं तो उनका टोटल बोर्ड के फाइनल टोटल से ज्यादा बैठता है.
मार्कशीट पर ‘स्टार मार्क (*)’ का क्या मतलब है?
सीबीएसई बोर्ड ने स्टूडेंट्स को समझाने के लिए बताया कि आंसरशीट के मूल्यांकन के बाद जिन प्रश्नों के अंकों को ‘ओवर अटेम्प्ट’ होने के कारण फाइनल रिजल्ट में शामिल नहीं किया गया है, कंप्यूटर सिस्टम उन्हें स्टार मार्क (*) के साथ दिखाता है. इसका सीधा मतलब है कि उस सवाल को जांचा तो गया है लेकिन कम नंबर होने के कारण उसे फाइनल स्कोरिंग में जगह नहीं मिली है. बोर्ड ने इसका एक पूरा उदाहरण भी अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी नोटिस में साझा किया है.
री-इवैल्युएशन का पोर्टल खुला, 6 जून तक आखिरी मौका
अगर स्टूडेंट्स अभी भी अपनी आंसरशीट में किसी अन्य विसंगति से असंतुष्ट हैं तो उनके लिए री-इवैल्यूएशन (दोबारा जांच) और वेरिफिकेशन का मौका खुला हुआ है:
- समय सीमा: बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं के वेरिफिकेशन और री-इवैल्युएशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल 2 जून से एक्टिव कर दिया है, जो 6 जून, 2026 तक ही खुला रहेगा.
- पात्रता: इस सुविधा का लाभ केवल वही स्टूडेंट्स उठा सकते हैं जिन्होंने पहले चरण में अपनी जांची गई आंसरशीट की स्कैन कॉपी प्राप्त कर ली थी.
- फीस स्ट्रक्चर: आंसर बुक में दिक्कतों के वेरिफिकेशन के लिए प्रति कॉपी ₹100 फीस तय की गई है, जबकि किसी खास सवाल के री-इवैल्युएशन के लिए ₹25 प्रति प्रश्न के हिसाब से ऑनलाइन भुगतान (UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग) करना होगा.
किन दिक्कतों के लिए अप्लाई कर सकते हैं?
सीबीएसई के स्टूडेंट्स अपनी स्कैन कॉपी में दिख रही कई प्रैक्टिकल समस्याओं के समाधान के लिए ऑनलाइन क्लेम कर सकते हैं. इसमें आंसरशीट का कोई पेज छूटना, सप्लीमेंट्री शीट या मैप/ग्राफ का काउंट न होना, कॉपी के पन्ने धुंधले होना, गलत सेट के आधार पर कॉपी जांच देना या फिर किसी विशेष प्रश्न का मूल्यांकन दोबारा कराना शामिल है. बोर्ड ने हिदायत दी है कि स्टूडेंट्स इन सभी शिकायतों के लिए केवल एक ही संकलित (Consolidated) एप्लीकेशन जमा करें.
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