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मालवीय नगर होटल अग्निकांड के दौरान 17 वर्षीय शिवानी ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बचाव कार्य में अहम भूमिका निभाई। शिवानी ने बताया कि सुबह करीब 8:25 बजे उसकी नींद शोर-शराबे से खुली। बाहर निकलने पर उसने सामने स्थित होटल से उठता काला धुआं और आग की लपटें देखीं। होटल की ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग खिड़कियों से मदद की गुहार लगा रहे थे।

मौके पर पहुंचने पर शिवानी ने अपने भाई सत्यम और मां रंजू को भी लोगों की मदद करते पाया। इसी दौरान कुछ लोगों ने घरों से गद्दे लाने की अपील की, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग ऊंचाई से कूदकर जान बचा सकें। शिवानी तुरंत घर पहुंची और अपने बिस्तर के गद्दे उठाकर घटनास्थल पर ले आई। जल्द ही अन्य लोग भी गद्दे लेकर पहुंच गए। कुछ ही देर बाद एक महिला ने ऊपर से छलांग लगा दी। वह गद्दों पर गिरी, लेकिन उसमें कोई हरकत नहीं थी। इसके बाद शिवानी और अधिक गद्दे जुटाने के लिए पड़ोसियों के घरों में मदद मांगने पहुंच गई।

शिवानी का कहना है कि हादसे के दौरान मदद करने वाले लोगों की संख्या कम थी, जबकि कई लोग मोबाइल फोन से वीडियो बनाने में व्यस्त थे। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली शिवानी और उसका परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है तथा लंबे समय से दिल्ली में रह रहा है। हादसे के बाद भी परिवार लोगों की मदद में जुटा रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही स्थानीय युवाओं ने लोगों को बचाने का अभियान शुरू कर दिया था। कुछ युवक होटल के भीतर घुस गए, जबकि कुछ ने बाहर बचाव की तैयारी शुरू कर दी। आसपास की दुकानों और घरों से गद्दे, कंबल और चादर लाकर होटल के नीचे बिछाई गई ताकि ऊपर से कूदने वाले लोगों की जान बचाई जा सके। आग लगने की खबर फैलते ही आसपास के लोग होटल के बाहर जमा होने लगे। हर कोई डरा था। होटल के अंदर से मदद के लिए आवाजें आ रही थीं। इसी बीच असरार खान, वकार, मोहम्मद अफजल, मोहम्मद शोएब खान, वसीम राजा और उनके साथियों ने हालात देखते हुए खुद राहत कार्य शुरू कर दिया।हादसे की प्रत्यक्षदर्शी शबीना खान ने बताया कि उस समय किसी को अपनी जान की परवाह नहीं थी।

सभी की कोशिश केवल इतनी थी कि किसी तरह होटल में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए। स्थानीय युवा वकार ने बताया कि आग लगने के कारण ऊपर खड़े लोग डर चुके थे। धुआं इतना था कि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हम लोगों ने नीचे गद्दे बिछाए और ऊपर वालों को आवाज लगाई कि अगर निकलने का कोई रास्ता नहीं है तो नीचे कूद जाएं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई लोगों ने तीसरी और चौथी मंजिल से छलांग लगाई। नीचे मौजूद युवाओं ने गद्दों को लगातार इधर-उधर खिसकाकर गिरने वाले लोगों को संभाला। अगर गद्दे नहीं बिछाए जाते तो ऊपर से कूदने वाले अधिकांश लोग गंभीर रूप से घायल हो सकते थे।

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