राजधानी में पिछले पांच महीनों के भीतर आग लगने की तीन बड़ी घटनाओं में 40 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं इमारत गिरने की घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई यानी 46 लोगों ने इस तरह की घटनाओं में जान गंवाई। हर हादसे के बाद सरकार, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से एक तयशुदा प्रतिक्रिया सामने आती है-फायर ऑडिट होगा, दोषियों पर कार्रवाई होगी, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। वादे चलते रहते हैं, जांच चलती रहती है…फिर कोई नई त्रासदी यह सवाल छोड़ जाती है कि आखिर इन घोषणाओं का नतीजा कहां है?
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