Khan Sir Controversy: पटना के चर्चित शिक्षक खान सर ने लाखों छात्रों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है. कम फीस में शिक्षा उपलब्ध कराने, जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के कारण वे देश के सबसे लोकप्रिय शिक्षकों में गिने जाते हैं. लेकिन उनकी सार्वजनिक छवि का दूसरा पक्ष भी है. पिछले कुछ वर्षों में उनके कई बयान, छात्र आंदोलनों में उनकी सक्रियता और विभिन्न विवादों से जुड़े आरोप लगातार चर्चा का विषय बने हैं. यही कारण है कि खान सर की पहचान केवल एक लोकप्रिय शिक्षक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे समय-समय पर विवादों के केंद्र में भी रहे हैं.
पटना कोचिंग विवाद के बाद चर्चा में खान सर
पुलिस ने नकारी फायरिंग की बात
पटना पुलिस ने घटनास्थल के आस-पास के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगालने और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ करने के बाद आधिकारिक बयान जारी किया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, खान सर के कोचिंग संस्थान के बाहर तोड़फोड़ और पथराव की घटना तो हुई है, लेकिन फायरिंग या गोलीबारी का कोई सबूत नहीं मिला है. पुलिस जांच में सामने आया है कि आपसी व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता और कोचिंग संचालकों के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते कुछ असामाजिक तत्वों और छात्रों ने वहां लगे पोस्टर-बैनर फाड़े और सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की पुष्टि के हवाई फायरिंग जैसे गंभीर दावे करने से युवाओं में अनावश्यक भ्रम और डर का माहौल पैदा होता है.
पटना पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि फायरिंग नहीं हुई है.
भ्रम का माहौल क्यों बनाया गया?
पटना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी फुटेज से खान सर के कोचिंग सेंटर पर फायरिंग की पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर “अपनी आंखों से 8 राउंड फायरिंग देखने” जैसी बात कहकर माहौल को गर्म क्यों किया गया? इतने संवेदनशील मुद्दे पर सार्वजनिक मंच से दिए गए बयान लाखों छात्रों और युवाओं को प्रभावित करते हैं, इसलिए किसी भी दावे से पहले तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है. अगर सच में फायरिंग हुई थी तो जांच में सामने आनी चाहिए, और अगर नहीं हुई तो फिर इस तरह की बात कहकर डर और भ्रम का माहौल क्यों बनाया गया?
भाषा की मर्यादा और पुराने विवाद
यह पहली बार नहीं है जब खान सर या पटना के कोचिंग संस्थान विवादों के केंद्र में आए हैं. हाल ही में एक टेलीविजन चैनल की एंकर द्वारा कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली पर की गई टिप्पणी के जवाब में खान सर ने कई तीखे व्यक्तिगत और अमर्यादित कटाक्ष किए थे, जिसकी समाज के बौद्धिक वर्ग में काफी आलोचना हुई थी.
- NEET पेपर लीक पर बयान: हालिया NEET विवाद में खान सर ने पेपर लीक को लेकर सख्त बयान दिए. उन्होंने पूछा कि दोषियों को फांसी क्यों नहीं दी गई, एनकाउंटर क्यों नहीं हुआ. कुछ ने इसे उत्तेजक बताया और माहौल को बिगाड़ने वाला बताया.
- इससे पहले, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान भी आयोग ने खान सर की भाषा को अशिष्ट और अश्लील बताते हुए उन पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी.
- इसके अतिरिक्त, साल 2022 में हुए रेलवे (RRB-NTPC) परीक्षा आंदोलन में भी छात्रों को हिंसा के लिए भड़काने के आरोप में खान सर समेत पटना के कई शिक्षकों पर पुलिस केस दर्ज हुआ था.
तथ्यों की पुष्टि और जिम्मेदारी जरूरी
शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े किसी भी बड़े चेहरे या संस्थान की यह नैतिक जिम्मेदारी होती है कि वे कोई भी सार्वजनिक दावा करने से पहले तथ्यों की ठीक से जांच कर लें. खान सर जैसे शिक्षकों को आज देश के लाखों छात्र अपना मार्गदर्शक मानते हैं. ऐसे में बिना किसी ठोस प्रमाण के कानून-व्यवस्था से जुड़ी इतनी संवेदनशील अफवाहें फैलाना युवाओं के भविष्य और सामाजिक शांति दोनों के लिए घातक साबित हो सकता है.
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