-14 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा अनूठा प्रकल्प, भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृत के वैभव से रूबरू होंगे लोग
-जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने किया स्थलीय निरीक्षण, गुणवत्ता और समयबद्ध निर्माण पर दिया विशेष जोर
-वेद, उपनिषद, महाकाव्य, संस्कृत श्लोक और आधुनिक सुविधाओं का अद्भुत संगम बनेगा संस्कृत दर्शन पार्क
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भारतीय संस्कृति, सनातन ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की महत्वाकांक्षी परियोजना संस्कृत दर्शन पार्क तेजी से आकार ले रही है। इंदिरापुरम में लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किए जा रहे इस विशेष पार्क का मंगलवार को जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने स्थलीय निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण किया जाए, ताकि यह पार्क गाजियाबाद की नई सांस्कृतिक पहचान बन सके। निरीक्षण के दौरान जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्रा, मुख्य अभियंता आलोक रंजन सहित अभियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि मौजूद रहे। उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने पार्क में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों, थीम आधारित संरचनाओं, हरित विकास, पाथ-वे, प्रकाश व्यवस्था, जल संरचनाओं और अन्य जनसुविधाओं का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता और अब तक हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।
उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने कहा कि संस्कृत दर्शन पार्क केवल एक पार्क नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र होगा। यहां आने वाले लोग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, वेदों, उपनिषदों, महाकाव्यों और संस्कृत साहित्य की महान परंपरा को आधुनिक और आकर्षक माध्यमों के जरिए समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गाजियाबाद को सांस्कृतिक और पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने का कार्य करेगी। गौरतलब है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। जीडीए ने इसे जून 2026 के अंत तक पूर्ण कर आमजन को समर्पित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है और विभिन्न सुविधाओं को तेजी से विकसित किया जा रहा है। संस्कृत दर्शन पार्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि यहां भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को आधुनिक तकनीक और आकर्षक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।
पार्क में संस्कृत भाषा की महत्ता, वेदों और उपनिषदों का ज्ञान, भारतीय चिंतन परंपरा, महाकाव्यों के प्रसंग और संस्कृत श्लोकों को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही विभिन्न थीम आधारित मूर्तियां और संरचनाएं आगंतुकों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराएंगी। पार्क परिसर में आकर्षक लैंडस्केपिंग, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था, सुंदर जल संरचनाएं, फव्वारे, खुले मंच, ओपन एयर गतिविधि क्षेत्र, बैठने की सुविधाएं और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक शिक्षा और ज्ञानवर्धन भी है। जीडीए का मानना है कि यह पार्क युवाओं और बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोडऩे का प्रभावी माध्यम बनेगा। निरीक्षण के दौरान नंद किशोर कलाल ने हरित क्षेत्र के विकास, स्वच्छता व्यवस्था, आगंतुकों की सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि पार्क में आने वाले लोगों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण मिलना चाहिए। इसके लिए सभी कार्यों को सर्वोच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अभियंत्रण टीम को नियमित निगरानी और बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक बाधा का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाए। परियोजना की गति और गुणवत्ता दोनों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
जीडीए उपाध्यक्ष ने विश्वास जताया कि संस्कृत दर्शन पार्क पूर्ण होने के बाद गाजियाबाद के प्रमुख पर्यटन और आकर्षण केंद्रों में शामिल होगा। यह न केवल शहर की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देगा, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को भारतीय ज्ञान, संस्कार और संस्कृति से जोडऩे का सशक्त माध्यम भी बनेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगी, जिसका लाभ समाज के हर वर्ग को मिलेगा।
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