राजस्थान रॉयल्स के युवा ओपनर और ‘बेबी बॉस’ के नाम से मशहूर 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर आईआईएम इंदौर देश की पहली मल्टी-डिसिप्लीनरी केस स्टडी करने जा रहा है. इस स्टडी के जरिए खेल मनोविज्ञान, प्रबंधन और उनके ‘सक्सेस फॉर्मूले’ को डिकोड किया जाएगा.
राजस्थान रॉयल्स के ओपनर बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने एक ही सीजन में सर्वाधिक 72 छक्के मारकर महान क्रिकेटर क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड (59 छक्के) ध्वस्त कर दिया है, जिसके बाद से पूरी दुनिया उनकी इस हैरतअंगेज बल्लेबाजी की मुरीद हो चुकी है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर डॉ हिमांशु राय ने कहा कि यह स्टडी केवल वैभव की खेल उपलब्धियों का ही विश्लेषण नहीं करेगी, बल्कि उनके सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, पारिवारिक और संस्थागत कारकों को भी गहराई से समझने की कोशिश करेगी, जो कम उम्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभाओं को आकार देने में मददगार साबित होते हैं. संस्थान का मानना है कि वैभव की क्रिकेट यात्रा के पीछे व्यक्तिगत क्षमता के साथ-साथ कड़ी मेहनत, परिवार का त्याग, समर्पण और मेंटर्स का योगदान भी बेहद अहम रहा है.
डॉ हिमांशु राय ने स्पष्ट किया कि इस रिसर्च स्टडी में सफलता के साथ-साथ टैलेंट के डार्क साइड पर भी पूरा फोकस किया जाएगा. अक्सर देखा जाता है कि बेहद कम उम्र में मिलने वाली भारी प्रसिद्धि, करोड़ों रुपये के आकर्षक ऑफर और सोशल मीडिया का अनियंत्रित दबाव युवा टैलेंट को विचलित कर देता है. इसके चलते कई बच्चे मानसिक थकान और अत्यधिक अपेक्षाओं के बोझ के तले दब जाते हैं और अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते. इस स्टडी के माध्यम से एक ऐसे इकोसिस्टम का ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा, जो कॉर्पोरेट जगत को भी टैलेंट मैनेजमेंट का एक बिल्कुल नया और प्रभावी मॉडल प्रदान करेगा. वैभव के शारीरिक मापदंडों और तकनीक की बात करें तो 5 फीट 7 इंच की हाइट और 55 किलो वजन वाले वैभव अपनी जबरदस्त बैट स्पीड और बेजोड़ टाइमिंग के दम पर बड़ी आसानी से गेंद को बाउंड्री पार भेजते हैं.
बचपन के कोच मनीष ओझा द्वारा तराशे गए वैभव की तकनीक और बैट स्पीड पर वर्तमान में राजस्थान रॉयल्स के जुबिन भरूचा विशेष काम कर रहे हैं, वहीं पूर्व कोच विक्रम राठौर भी उनके शानदार बैलेंस के कायल हैं. इस खिलाड़ी का डिसीजन टाइम महज 0.3 सेकंड है, जिसके कारण विपक्षी गेंदबाजों को अपनी रणनीति में सेट होने का मौका ही नहीं मिलता. उनकी बेबाकी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब पूर्व दिग्गज राहुल द्रविड़ ने उन्हें संभालकर खेलने की सलाह दी थी, तो वैभव का बेबाक जवाब था, ‘सर, गेंदबाज मुझे देखे.’ आउट होने के डर से पूरी तरह मुक्त होने के कारण उनका यह अनोखा खेल रवैया मैच के प्रेशर में भी कभी प्रभावित नहीं होता. मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ आरती चोपड़ा ने कहा कि मजबूत इकोसिस्टम और दूरदर्शी नेतृत्व पर केंद्रित यह स्टडी भविष्य के प्रबंधकों और नीति-निर्माताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान साबित होगी.
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