Building Collapse:इम्तिहान के 26 दिन पहले मलबे में दब गई छात्रों की सालभर की मेहनत, लाइब्रेरी में फंसा भविष्य – Students’ Entire Year’s Hard Work Buried Under The Rubble Following A Building Collapse In Delhi
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दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब इलाके में इमारत ढहने की घटना ने केवल एक भवन को नहीं, बल्कि सैकड़ों छात्रों के सपनों और वर्षों की मेहनत को भी गहरी चोट पहुंचाई है। इस हादसे के बाद मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के सामने पढ़ाई जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। विशेष रूप से फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह हादसा बेहद मुश्किल समय में सामने आया है, क्योंकि परीक्षा में अब केवल 26 दिन शेष हैं।
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Delhi Building Collapses
– फोटो : अमर उजाला
हादसे के समय इमारत से सटी एक लाइब्रेरी में 150 से अधिक छात्र सेल्फ स्टडी कर रहे थे। अचानक इमारत गिरने और अफरा-तफरी मचने के बीच छात्रों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। इस दौरान उनके नोट्स, किताबें, लैपटॉप, टैबलेट, मोवाइल फोन और अन्य अध्ययन सामग्री लाइब्रेरी में ही छूट गई, जो अब मलबे और क्षतिग्रस्त इमारतों के बीच फंसी हुई है।
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Delhi Building Collapses
– फोटो : अमर उजाला
सैदुल्लाजाब और आसपास का क्षेत्र लंबे समय से मेडिकल, इंजीनियरिंग और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रमुख केंद्र रहा है यहां देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों छात्र किराये के कमरों और छात्रावासों में रहकर अपने भविष्य को संवारने का प्रयास करते हैं। लेकिन इस हादसे ने उनकी दिनचर्या, तैयारी और मानसिक संतुलन को झकझोर कर रख दिया है।
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Saket Building Collapse
– फोटो : अमर उजाला
रात में नींद नहीं आती
छात्र सौरभ बताते हैं कि उस दिन क्लास देर से शुरू हुई थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्र हादसे के समय इमारत में मौजूद नहीं थे और एक बड़ी त्रासदी बच गई। बावजूद इसके, घटना का भयावह दृश्य और इमारत गिरने की आवाज अब भी छात्रों के मन में ताजा है। कई छात्रों ने बताया कि उन्हें रात में नींद नहीं आती और वे लगातार उस घटना को याद कर परेशान हो जाते हैं।
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Saket Building Collapse
– फोटो : PTI
नोट्स के लिए छात्र लगा रहे पुलिस से गुहार
एफएमजीई की तैयारी कर रहे छात्र मूसा बताते हैं कि इमारत गिरने का दुख तो है ही, लेकिन सबसे अधिक चिंता उन नोट्स की है जिन्हें तैयार करने में महीनों की मेहनत लगी थी। उनके अनुसार यदि प्रशासन मलबे से अध्ययन सामग्री और दस्तावेज निकालने में मदद कर दे तो तैयारी को फिर से पटरी पर लाया जा सकता है। कई अन्य छात्रों की भी यही चिंता है।