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विशेश्वरगंज जहां की रहने वाली शिवकुमारी आर्थिक रूप से काफी परेशान चल रही थी. तब लगभग 8 साल पहले ही इनको सरकार की योजना समूह के बारे में जानकारी मिली और फिर समूह की दीदी से मिलकर उन्होंने लोन लिया और फिर झाड़ू बनाने का काम शुरू कर दिया. अब बाहर से रॉ मैटेरियल लाकर हर रोज दो तरह की झाड़ू बनाकर यह तैयार करती हैं जिसकी बिक्री की बात करें तो खूब हो रही है और जिले में एक अपना अलग नाम भी बना रही है.

बहराइच: जहां एक और घर की महिलाएं घर में झाड़ू बर्तन में ही अपनी जिंदगी गवा देती हैं. वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी है जो समूह से जुड़कर अब झाड़ू लगा नहीं बल्कि झाड़ू बनाकर अपनी जिंदगी सवार रही है. ऐसी ही एक महिला बहराइच जिले के विशेश्वरगंज की रहने वाली है जो इन दिनों घर बैठे झाड़ू के व्यापार से महीने का 10 हजार से 15000 रुपए बड़ी आसानी से कमा ले रही है.जिसमे यह सीख, और खजूर पत्ती की झाड़ू बना कर तैयार करती है.

सरकार की योजना से बदली जिंदगी

बहराइच मुख्यालय से लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर विशेश्वरगंज जहां की रहने वाली शिवकुमारी आर्थिक रूप से काफी परेशान चल रही थी. तब लगभग 8 साल पहले ही इनको सरकार की योजना समूह के बारे में जानकारी मिली और फिर समूह की दीदी से मिलकर उन्होंने लोन लिया और फिर झाड़ू बनाने का काम शुरू कर दिया. अब बाहर से रॉ मैटेरियल लाकर हर रोज दो तरह की झाड़ू बनाकर यह तैयार करती हैं जिसकी बिक्री की बात करें तो खूब हो रही है और जिले में एक अपना अलग नाम भी बना रही है. 8 साल पहले जब समूह में नहीं जुड़ी थी तब आर्थिक स्थिति बदसेबत्तर थी इन आठ सालों में शिवकुमारी ने न सिर्फ अपनी जिंदगी में चार चांद लगाया है बल्कि अपने साथ-साथ अपने परिवार को भी आगे बढ़ाया है.

महीने में घर बैठी होती कमाई

वैसे तो मार्केट में आपको तमाम तरीके की झाड़ू मिल जाती है. जिसकी शुरुआती कीमत 50-60 रुपए से लगाकर सौ, दो सौ रुपए तक होती है. जो लंबे समय तक टिकती भी नहीं है और साल के अंदर ही खराब भी हो जाती है. लेकिन वही अगर बात की जाए बहराइच की महिला द्वारा बनाकर तैयार किए जाने वाली झाड़ू की तो यह सालों तक चलती है और कीमत भी मात्र 30 से 40 रुपये तक होती है. शायद यही वजह है जो अब तेजी से शिवकुमारी द्वारा बनाई गई झाड़ू का बिजनेस फल फूल रहा है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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