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IMD Monsoon Alert: देश में जून का महीना आते ही आमतौर पर लोगों की नजरें आसमान पर टिक जाती हैं. किसान खेतों की तैयारी शुरू कर देते हैं. शहरों में लोग गर्मी से राहत की उम्मीद करने लगते हैं. लेकिन इस बार मानसून को लेकर जो तस्वीर सामने आई है, उसने चिंता बढ़ा दी है. भारतीय मौसम विभाग यानी IMD ने साफ संकेत दिए हैं कि जून 2026 में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. यही नहीं, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान भी बारिश Long Period Average यानी LPA के केवल 90 फीसदी तक रहने का अनुमान जताया गया है. इसका मतलब यह है कि इस साल गर्मी जल्दी पीछा छोड़ने वाली नहीं है. खेतों से लेकर बिजली उत्पादन और पेयजल संकट तक, कई मोर्चों पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत के बड़े हिस्सों में मानसून कमजोर रह सकता है.

IMD की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब देश पहले से ही भीषण गर्मी और हीटवेव का सामना कर रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा और गुजरात जैसे राज्यों में तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है, जिसका सीधा असर भारतीय मानसून पर पड़ सकता है. अल नीनो आमतौर पर समुद्री तापमान बढ़ाता है और भारत में बारिश को कमजोर कर देता है. हालांकि हिंद महासागर में IOD फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन वह भी मानसून को बहुत ज्यादा ताकत देता नजर नहीं आ रहा. ऐसे में जून महीने में बारिश की कमी और लू का डबल अटैक लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है. IMD ने राज्यों को पहले से तैयारी मजबूत करने की सलाह भी दी है.
IMD ने राज्यों को सलाह दी है कि वे हीटवेव और संभावित जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करें. (फोटो PTI)

जून में कमजोर पड़ सकता है मानसून का दम

  • IMD के मुताबिक जून से सितंबर 2026 के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की सबसे ज्यादा संभावना है. मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल मानसून का प्रदर्शन औसत से नीचे रह सकता है. सबसे ज्यादा असर उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय इलाकों में देखने को मिल सकता है. Monsoon Core Zone यानी कृषि आधारित क्षेत्रों में भी बारिश कम रहने का खतरा जताया गया है. यही वजह है कि खेती-किसानी से जुड़े राज्यों में चिंता बढ़ गई है.
  • जून महीने में देश के अधिकतर हिस्सों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है. IMD के अनुसार उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश में सामान्य से ज्यादा हीटवेव वाले दिन देखने को मिल सकते हैं. महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी लू का असर बढ़ सकता है. यानी बारिश कम और गर्मी ज्यादा रहने का खतरा एक साथ मंडरा रहा है.
  • कम बारिश का असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. इसका सबसे बड़ा असर खेती पर पड़ सकता है. अगर जून और जुलाई में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान, दाल और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. कई राज्यों में पहले से ही जलाशयों का जलस्तर कम है. ऐसे में पानी की कमी और गंभीर हो सकती है. बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है क्योंकि देश के कई हिस्सों में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट मानसूनी पानी पर निर्भर रहते हैं.

अल नीनो ने बढ़ाई टेंशन

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अल नीनो की स्थिति मानसून पर भारी पड़ सकती है. अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाता है, जिससे भारत की मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं. यही वजह है कि IMD ने पहले ही कम बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है. हालांकि उत्तर-पूर्व भारत में सामान्य बारिश की उम्मीद जताई गई है, लेकिन देश के बड़े हिस्से में हालात चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं.

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अल नीनो की स्थिति मानसून पर भारी पड़ सकती है. (PTI)

राज्यों को दी गई तैयारी की सलाह

IMD ने राज्यों को सलाह दी है कि वे हीटवेव और संभावित जल संकट से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू करें. अस्पतालों, बिजली विभागों और जल आपूर्ति एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है. किसानों को भी मौसम के अपडेट पर नजर रखने और कम पानी वाली फसलों पर विचार करने की सलाह दी जा रही है. आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करेंगे कि मानसून कितनी राहत देता है और कितनी चिंता बढ़ाता है.

IMD ने इस साल मानसून को लेकर क्या बड़ा अनुमान जारी किया है?

IMD के अनुसार जून से सितंबर 2026 के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. मानसून Long Period Average यानी LPA का करीब 90 फीसदी रह सकता है. इसका असर खासतौर पर उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में ज्यादा देखने को मिल सकता है.

अल नीनो का मानसून पर क्या असर पड़ता है?

अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ा देता है. इसका असर भारतीय मानसून पर पड़ता है और बारिश कमजोर हो जाती है. कई बार इसकी वजह से सूखे जैसे हालात भी बन जाते हैं. इस साल भी मौसम वैज्ञानिक इसी खतरे को लेकर चिंता जता रहे हैं.

कम बारिश से सबसे ज्यादा असर किन क्षेत्रों पर पड़ेगा?

कम बारिश का सबसे बड़ा असर खेती, पेयजल व्यवस्था और बिजली उत्पादन पर पड़ सकता है. खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है. जलाशयों का स्तर गिर सकता है और कई राज्यों में पानी की कमी बढ़ सकती है. साथ ही हीटवेव के कारण लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

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