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होमताजा खबरकृषिपशुओं में भूलकर भी नजरअंदाज न करें ये खतरनाक लक्षण, वरना हो जाएगी मुश्किल

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Animal Care Tips: मई का महीना खत्म होने को है और जून की शुरुआत के साथ ही यूपी में मॉनसून की दस्तक होने वाली है. ऐसे में अगर आप एक पशुपालक हैं या आपके घर में गाय-भैंस जैसे दुधारू मवेशी हैं, तो आपको अभी से बेहद सावधान होने की जरूरत है. बरसात के मौसम में पशुओं को ‘गलघोंटू’ नाम की एक बेहद खतरनाक और संक्रामक बीमारी घेरती है, जो इतनी जानलेवा है कि सही समय पर इलाज न मिलने पर पशु दम तोड़ देता है. बलिया सदर के डिप्टी CVO डॉ. S.D. द्विवेदी ने इस बीमारी को लेकर पशुपालकों के लिए जरूरी अलर्ट जारी किया है. उन्होंने बताया है कि कैसे सिर्फ एक गलती से आपका भारी नुकसान हो सकता है.

बलिया: मई का महीना खत्म होने को है और जून की शुरुआत होने वाली है. अगर आप भी गाय, भैंस या अन्य दुधारू पशु पालते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है. इस समय पशुओं की सेहत को लेकर थोड़ी सी भी लापरवाही आपके लिए भारी नुकसान की वजह बन सकती है. दरअसल, हर साल जुलाई के महीने में मवेशियों में एक बेहद घातक और जानलेवा बीमारी फैलती है, जिसकी चपेट में आने के बाद पशुओं को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है. हम बात कर रहे हैं पशुओं में होने वाली ‘गलघोंटू’ बीमारी की. इससे अपने बेजुबान जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए पशुपालकों को अभी से कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा.

क्या है गलघोंटू बीमारी और क्यों है इतनी खतरनाक?
बलिया सदर के डिप्टी सीवीओ डॉ. एस.डी. द्विवेदी ने बताया कि गलघोंटू पशुओं के लिए एक बेहद गंभीर जानलेवा बीमारी है. यह मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं को अपना शिकार बनाती है. यह रोग एक खास तरह के बैक्टीरिया के कारण पनपता है. इस बीमारी के होते ही पशु के शरीर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ने लगता है, गले में भयंकर सूजन आ जाती है और सांस लेना दूभर हो जाता है. समय पर सही इलाज न मिलने की स्थिति में पशु तड़प-तड़पकर दम तोड़ देता है.

इन लक्षणों को देखते ही हो जाएं सतर्क
डॉ. द्विवेदी के मुताबिक, गलघोंटू बीमारी को शुरुआती दौर में ही पहचानना बहुत जरूरी है. इसके मुख्य लक्षणों में पशु के गले से अजीब सी ‘घर-घर’ की आवाज आना शामिल है. इसके साथ ही पशु की आंखें एकदम लाल हो जाती हैं और आंखों से लगातार पानी गिरने लगता है. गले के आसपास तेज सूजन आ जाती है, जिससे उसे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती है. इस बीमारी की चपेट में आते ही पशु को बहुत तेज बुखार हो जाता है और वह पूरी तरह से दाना-पानी छोड़ देता है. अगर मवेशी में ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक मिनट की भी देरी किए तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल जाकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

बचाव का इकलौता हथियार, मई-जून में टीकाकरण
इस जानलेवा बीमारी से निपटने का सबसे कारगर और इकलौता उपाय समय पर टीकाकरण कराना है. डॉ. द्विवेदी ने बताया कि चूंकि यह बीमारी जुलाई के महीने में सबसे ज्यादा फैलती है, इसलिए इससे बचाव का टीका मई से जून के दौरान ही लग जाना चाहिए. राहत की बात यह है कि इस समय सरकारी स्तर पर पशुओं के टीकाकरण का विशेष अभियान चलाया जा रहा है और क्षेत्र के बहुत से मवेशियों को यह सुरक्षा कवच दिया जा चुका है. जिन पशुपालकों ने अभी तक अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं करवाया है, वे तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या टीम से संपर्क कर टीका लगवा सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें

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