-अवैध शराब माफियाओं पर सख्त प्रहार कर बनाई अलग पहचान, राजस्व बढ़ोतरी में गाजियाबाद बना प्रदेश का पावर सेंटर
-सिर्फ सात इंस्पेक्टरों की टीम ने लाखों की आबादी वाले जिले में कायम की कार्रवाई और अनुशासन की मिसाल
-लाइसेंसी दुकानों से लेकर तस्करों तक पर पैनी नजर, हर महीने करोड़ों रुपये पहुंचा रहा विभाग
-1889 करोड़ के ऐतिहासिक राजस्व के बाद अब 2765 करोड़ के लक्ष्य पर दौड़ रही आबकारी टीम
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर तेजी से उभरता गाजियाबाद अब केवल उद्योग, कारोबार और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ही नहीं, बल्कि सरकारी खजाने को भरने में भी प्रदेश का सबसे मजबूत स्तंभ बनता जा रहा है। प्रदेश के प्रमुख राजस्व देने वाले जिलों में गाजियाबाद ने अपनी अलग पहचान बनाई है। गौतमबुद्ध नगर, आगरा, लखनऊ, मेरठ, कानपुर और वाराणसी जैसे बड़े जिलों के बीच गाजियाबाद का नाम अब मजबूती से लिया जा रहा है। खासतौर पर आबकारी विभाग ने जिस तरह बीते कुछ वर्षों में रिकॉर्ड राजस्व जुटाया है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस सफलता के केंद्र में हैं जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम, जिन्होंने अपने नेतृत्व, रणनीतिक कार्यशैली और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण के जरिए विभाग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। विभागीय गलियारों में उन्हें अब ‘राजस्व बाहुबली’ के नाम से देखा जाने लगा है। वजह साफ है-जहां एक ओर उन्होंने अवैध शराब कारोबारियों की कमर तोड़ी, वहीं दूसरी ओर लाइसेंसी दुकानों में अनुशासन और पारदर्शिता लागू कर राजस्व बढ़ाने का नया मॉडल तैयार किया।
गाजियाबाद की इस ‘राजस्व सेना’ के सेनापति संजय कुमार प्रथम और उनकी टीम अब नए लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रही है। यदि यही रफ्तार कायम रही तो आने वाले वर्षों में गाजियाबाद आबकारी विभाग प्रदेश में राजस्व और प्रशासनिक कार्यशैली का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकता है। गाजियाबाद जैसा विशाल और संवेदनशील जिला आबकारी विभाग के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। वर्ष 2026 में जिले की अनुमानित जनसंख्या 24.8 लाख से अधिक और महानगर क्षेत्र की आबादी 35 लाख के पार पहुंच चुकी है। इतनी बड़ी आबादी के बीच शराब कारोबार पर निगरानी रखना आसान नहीं माना जाता। इसके बावजूद विभाग के पास संसाधनों के नाम पर मात्र सात आबकारी इंस्पेक्टर हैं। लेकिन यही छोटी टीम आज अपनी कार्यशैली से पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस टीम में इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, कीर्ति सिंह, अनुज सिंह, चमन सिंह, चन्द्रजीत सिंह और दिनेश सिंह शामिल हैं। इन अधिकारियों ने संजय कुमार प्रथम के नेतृत्व में मैदान में उतरकर जिस तरह अवैध शराब कारोबार के खिलाफ अभियान चलाया, उसने माफियाओं के नेटवर्क को हिलाकर रख दिया। गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी अभियान चलाए गए। शराब के अवैध निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर कई बड़े नेटवर्क ध्वस्त किए गए।
राजस्व के आंकड़ों ने लिखी सफलता की नई कहानी
वर्ष 2023-24 में गाजियाबाद आबकारी विभाग ने 1494.31 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को दिया था। इसके बाद वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1615.32 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं वर्ष 2025-26 में विभाग ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 1889.23 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक राजस्व अर्जित किया। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं, बल्कि विभाग की सख्त निगरानी, रणनीतिक प्लानिंग और टीम वर्क का परिणाम मानी जा रही है।
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संजय कुमार प्रथम की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने केवल अवैध कारोबार पर कार्रवाई तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने लाइसेंसी शराब दुकानों की व्यवस्था को भी पूरी तरह बदलने का प्रयास किया। दुकानदारों को साफ निर्देश दिए गए कि ग्राहकों के साथ व्यवहार सौम्य और पारदर्शी होना चाहिए। ओवररेटिंग, नियमों के विरुद्ध बिक्री और अनियमितताओं पर विभाग ने लगातार कार्रवाई की। इसका असर यह हुआ कि जहां राजस्व में बढ़ोतरी हुई, वहीं विभाग की छवि भी मजबूत हुई।
अवैध शराब के खिलाफ लगातार चला ‘हंटर’
वर्ष 2024-25 में आबकारी विभाग ने 1133 मुकदमे दर्ज कर 36028.27 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की थी। इसके बाद वर्ष 2025-26 में कार्रवाई और तेज हुई। विभाग ने 1189 मुकदमे दर्ज करते हुए 38794.80 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद की। इन अभियानों के दौरान कई तस्करों को गिरफ्तार किया गया और अवैध शराब निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त किए गए।
आबकारी विभाग की सबसे बड़ी ताकत उसकी त्वरित कार्रवाई मानी जा रही है। विभाग की टीमें लगातार रात-दिन अभियान चलाकर संदिग्ध क्षेत्रों पर नजर रखती हैं। यही कारण है कि जिले में अवैध शराब कारोबार करने वालों में विभाग का भय साफ दिखाई देता है।
अब 2765 करोड़ के लक्ष्य पर दौड़ रही टीम
वर्ष 2026-27 के लिए शासन ने गाजियाबाद आबकारी विभाग को 2765.89 करोड़ रुपये का बड़ा लक्ष्य सौंपा है। विभाग ने इसकी शुरुआत भी दमदार अंदाज में की है। अप्रैल माह में टीम ने 186.27 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया, जबकि मई माह में 28 मई तक करीब 158.11 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया जा चुका है। इसके अलावा बार लाइसेंसों से भी विभाग को हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है।
निष्पक्ष कार्रवाई ने बढ़ाया भरोसा
आबकारी विभाग की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जा रही है कि कार्रवाई केवल अवैध कारोबारियों तक सीमित नहीं रहती। यदि कोई लाइसेंसी विक्रेता भी नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो विभाग उस पर भी सख्ती से कार्रवाई करता है। विभाग की यही निष्पक्षता उसे अन्य जिलों से अलग पहचान दिला रही है। आज गाजियाबाद आबकारी विभाग केवल राजस्व जुटाने वाला विभाग नहीं रह गया, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, अनुशासन और सख्त कार्यशैली का मॉडल बन चुका है। सीमित संसाधनों और छोटी टीम के बावजूद जिस तरह विभाग लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, उसने यह साबित कर दिया है कि मजबूत नेतृत्व और ईमानदार टीम किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकती है।
सात योद्धाओं की टीम पर टिका आबकारी विभाग का पूरा ‘ऑपरेशन राजस्व’
गाजियाबाद जैसे विशाल, संवेदनशील और अत्यधिक व्यस्त जिले में आबकारी विभाग की जिम्मेदारी संभालना किसी चुनौती से कम नहीं माना जाता। लाखों की आबादी, सैकड़ों लाइसेंसी शराब दुकानें, बार, होटल और अवैध कारोबार की लगातार सक्रिय कोशिशों के बीच पूरे जिले की निगरानी का जिम्मा केवल सात आबकारी इंस्पेक्टरों के कंधों पर है। संसाधन सीमित होने के बावजूद इन अधिकारियों ने अपनी मेहनत, सतर्कता और सख्त कार्यशैली से यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे और ईमानदार रणनीति किसी भी बड़े सिस्टम को सफल बना सकती है। इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, कीर्ति सिंह, अनुज सिंह, चमन सिंह, चन्द्रजीत सिंह और दिनेश सिंह की टीम आज जिले में आबकारी विभाग की असली ताकत बनकर उभरी है। यह टीम केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि दिन-रात फील्ड में उतरकर अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ मोर्चा संभाले रहती है। जिले के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी, जांच, निरीक्षण और निगरानी अभियान चलाकर टीम ने अवैध शराब माफियाओं की कमर तोडऩे का काम किया है। इंस्पेक्टर मनोज शर्मा जो कठोर अनुशासन और तेज निर्णय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले इंस्पेक्टर मनोज शर्मा हर कार्रवाई को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देते हैं।
अवैध शराब कारोबार पर उनकी पैनी नजर रहती है और टीम संचालन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार शांत स्वभाव लेकिन बेहद सक्रिय कार्यशैली वाले अखिलेश कुमार सूचना तंत्र को मजबूत रखने में माहिर हैं। मुखबिर नेटवर्क और सटीक रणनीति के जरिए कई बड़ी कार्रवाइयों को सफल बनाने में उनकी अहम भूमिका रहती है। इंस्पेक्टर कीर्ति सिंह साहस, ईमानदारी और संवेदनशील कार्यशैली की पहचान रखने वाली कीर्ति सिंह कठिन परिस्थितियों में भी बेखौफ होकर कार्रवाई करती हैं। विभाग में उनकी छवि एक सख्त लेकिन जिम्मेदार अधिकारी की मानी जाती है। इंस्पेक्टर अनुज सिंह तकनीकी समझ और आधुनिक जांच शैली के लिए चर्चित अनुज सिंह हर केस की गहराई तक पहुंचने में विश्वास रखते हैं। टीमवर्क और तेजी से कार्रवाई करना उनकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है।
इंस्पेक्टर चमन सिंह जमीन से जुड़े और मेहनती अधिकारी के रूप में पहचान रखने वाले चमन सिंह लगातार फील्ड में सक्रिय रहते हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अवैध शराब नेटवर्क पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। इंस्पेक्टर चन्द्रजीत सिंह कानूनी प्रक्रिया की गहरी जानकारी रखने वाले चन्द्रजीत सिंह हर कार्रवाई को मजबूत साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाते हैं। उनकी कार्यशैली में पारदर्शिता और सटीकता साफ दिखाई देती है। इंस्पेक्टर दिनेश सिंह तेज रफ्तार कार्रवाई और दबंग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले दिनेश सिंह चुनौतीपूर्ण अभियानों में हमेशा अग्रिम भूमिका निभाते हैं। अपराधियों पर सख्ती और विभाग के प्रति समर्पण उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
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