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Dog Bite Home Remedy: समस्तीपुर के ग्रामीण इलाकों में आज भी घाव और कुत्ता काटने पर ‘कोचिला’ जैसे पीढ़ियों पुराने देसी नुस्खे से प्राथमिक उपचार करने की परंपरा है. जहां ग्रामीण बुजुर्ग इस पारंपरिक चिकित्सा को कारगर मानते हैं. वहीं डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि रेबीज जैसे गंभीर मामलों में लापरवाही जानलेवा हो सकती है. इसलिए अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है.

समस्तीपुर: समस्तीपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जो छोटी-मोटी बीमारियों और घाव के इलाज के लिए घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं. आधुनिक दौर में जहां लोग तेजी से अंग्रेजी दवाओं की ओर बढ़ रहे हैं. वहीं गांवों के बुजुर्ग अब भी पुराने देसी उपचार को कारगर मानते हैं. इन्हीं पारंपरिक तरीकों में एक नाम कोचिला का भी सामने आता है. जिसे ग्रामीण लोग घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. समस्तीपुर के गोरगमा गांव के रहने वाले बुजुर्ग विष्णु शरण बताते हैं कि कोचिला का उपयोग वर्षों से गांवों में होता आ रहा है. उनके अनुसार, पहले के समय में जब दवाइयों की सुविधा कम थी. तब लोग पेड़-पौधों और घरेलू चीजों से ही इलाज किया करते थे. उन्होंने बताया कि आज भी गांव के कई लोग घाव या शरीर की अन्य छोटी समस्याओं में कोचिला का उपयोग करते हैं.

आग में पकाकर नारियल तेल के साथ लगाया जाता है कोचिला
विष्णु शरण के मुताबिक कोचिला को सबसे पहले आग में अच्छी तरह पकाया जाता है. पकने के बाद उसे नारियल तेल में डुबोकर रखा जाता है. इसके बाद उस मिश्रण को घाव वाली जगह पर लगाया जाता है. उनका दावा है कि इससे पुराने घाव भी धीरे-धीरे सूखने लगते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह तरीका वर्षों से अपनाया जा रहा है और कई लोग इसे आज भी उपयोगी मानते हैं. उन्होंने कहा कि गांव में उगने वाले कोचिला को लोग बेचने के बजाय अपने उपयोग के लिए संभाल कर रखते हैं. खासकर बुजुर्गों के बीच यह धारणा है कि प्राकृतिक चीजों से तैयार उपचार शरीर पर कम दुष्प्रभाव डालते हैं. हालांकि ग्रामीण खुद भी मानते हैं कि गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है.

कुत्ता काटने में भी पारंपरिक उपयोग का दावा
गांव के युवक मो.मुस्ताक अंसारी ने बताया कि उनके यहां कोचिला का इस्तेमाल कुत्ता काटने जैसी स्थिति में भी पारंपरिक तरीके से किया जाता रहा है. उन्होंने कहा कि एक बार उन्हें कुत्ते ने काट लिया था. तब घरवालों ने कोचिला के बीज को चार हिस्सों में काटकर रातभर पानी में भिगो दिया. सुबह उस बीज को निकालकर पानी पीने के लिए दिया गया. ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा काफी पुरानी है और पीढ़ियों से चली आ रही है. हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा किसी भी गंभीर बीमारी या कुत्ता काटने जैसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय उपचार लेने की सलाह देते हैं.

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Amit ranjanमैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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