Agra History: आज दुनिया भर में अपनी मोहब्बत की इमारत ‘ताजमहल’ के लिए मशहूर आगरा का इतिहास सिर्फ मुगलों तक ही सीमित नहीं है. इस ऐतिहासिक शहर की बुनियाद दिल्ली सल्तनत के एक बेहद चतुर और योग्य सुल्तान ने रखी थी. इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यदि साल 1504 में सुल्तान सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी सैन्य छावनी न बनाया होता, तो शायद आज यह शहर वैश्विक पटल पर इतना मशहूर न होता. महाभारत काल के ‘अग्रवन’ से लेकर मुगलों के ‘स्वर्ण युग’ तक, आइए जानते हैं आगरा के स्थापना की वह अनसुनी कहानी, जो सिकंदर लोदी के एक चतुर फैसले से शुरू हुई थी.
कहा जाता है कि आगरा से ही सिकंदर लोदी ग्वालियर पर नज़र रखते थे. लोदी वंश के बाद सन 1526 में बाबर ने आगरा पर कब्जा कर लिया. मुगलों के अधीन यह शहर अपने स्वर्ण युग में पहुंच चुका था. वर्ष 1526 से 1658 तक मुगल बादशाहों जैसे अकबर, जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल में यह मुगल साम्राज्य की प्रमुख राजधानी बना रहा. इस दौरान कई खूबसूरत मुग़ल इमारतों का निर्माण आगरा में कराया गया. इतिहासकार बताते हैं कि यदि सिकंदर लोदी 1504 में आगरा नहीं आते, तो शायद ही आज आगरा इतना मशहूर होता और मुग़लों की राजधानी भी बन पाता, क्योंकि 1504 से पहले आगरा का ऐसा कोई वजूद नहीं हुआ करता था, जितना कि सिकंदर लोदी के आने के बाद हुआ.
सैन्य छावनी से लेकर राजधानी बनने का सफर
आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने बताया कि आगरा की स्थापना सन 1504 में हुई थी. लोदी वंश के शासक सिकंदर लोदी ने ही आगरा की स्थापना की थी. इतिहासकार ने बताया कि दिल्ली के बाद उन्होंने आगरा पर न सिर्फ कब्जा किया, बल्कि इसे ही अपनी राजधानी भी बनाया. उन्होंने बताया कि शुरुआत में सिकंदर लोदी ने आगरा शहर का उपयोग ग्वालियर पर नज़र रखने के लिए एक सैन्य छावनी के रूप में किया था.
उन्होंने आगे बताया कि धीरे-धीरे सिकंदर लोदी ने आगरा पर पूरी तरह से अपनी हुकूमत जमा ली और राजधानी के रूप में यहां से राज करने लगे. इतिहास के अनुसार सिकंदर लोदी ने आगरा को अपनी राजधानी इसलिए बनाया था ताकि वह यहां रहकर ग्वालियर के राजा मानसिंह पर नियंत्रण रख सकें और दिल्ली से आगे बढ़कर अपना सैन्य आधार और भी ज्यादा मजबूत कर सकें. धीरे-धीरे सिकंदर लोदी ने अपने राज्य का विस्तार करना शुरू कर दिया. सिकंदर लोदी ने जौनपुर, बिहार, पूर्वी राजस्थान और चंदेरी तक अपनी हुकूमत जमा ली थी. हालांकि बाद में मुग़लों के आगमन से सिकंदर लोदी का साम्राज्य समाप्त हो गया.
निजाम खान से दिल्ली की गद्दी तक
आगरा के वरिष्ठ प्रोफेसर और इतिहासकार अनुराग पालीवाल ने बताया कि सिकंदर लोदी एक बेहद चतुर, चालाक और योग्य शासक था. वह अच्छी तरह जानता था कि किस तरह से वह अपने साम्राज्य को बढ़ा सकता है. इतिहासकार ने बताया कि सिकंदर लोदी के बचपन का नाम ‘निज़ाम खान’ था. यह लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी के पुत्र थे. उन्होंने कहा कि सन 1489 में सिकंदर लोदी ने जब अपने पिता को खो दिया था, तब फिर उन्हें दिल्ली की गद्दी पर बैठाया गया था. जिसके बाद सिकंदर लोदी दिल्ली सल्तनत के सुल्तान बने.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
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